जगत लक बइर
18 "अदी जगत तुमरो लक बइर राखासे तो तुम्हि जानासो की ओना तुमरो लक पुड़ा मोरो लक बयिर राखिस। 19 अदी तुमी जगत का होतत, तो जगत तुमरो लक माया राखतो, पर एको काजी की तुमी जगत को नही सेव, काहेका मि ला जगत मा लक निवाड़ी सेव। एकोलाय जगत तुमी लक बइर राखासे।