अंगूर को बगीचा को बनिहार
1 "सरग को राज एक जमींदार को किस्सा जसो से। जोन भुन्सारे आपरो अंगुर को बगीचा मा काम करन बनिहार लावन हिटयो। 2 ओना खुरो को एक रुपया20:2रोमन सरकार को एक दिनार मजे एक दिवस को बनी से। मा ठहरायके नौकर बनिहार ठहरायो। अना उनला आपरो अंगूर को बगीचा मा काम करन लाई धाड़ देइस। 3 मंग बनिहारी बेरा जमींदार मंग घर लक हिटयो अना हाट मा गयो। वोला काही बनिहार लोकहुन ला हाट मा इता-उता हिंडत चोवयो। 4 तबा वोना उनलक कह्यो, ‘तुम्हि भी मोरो अंगुर को बगीचा मा जाव, अखिन काम करो, तुमला तुमरो बेस बनी देहुँ।’ 5 वय बगीचा मा काम करन लाई चली गईन, मंग कोनी ला दुफरिया बेरा मा अना कोनी ला महातनी बेरा मा जायके वसोच कव्हके आनिस। 6 तबा कोनी पील-पील दिवस मा मंग हाट गयो, अना मंग काही लोकहुन ला हाट मा इता-उता उभो चोईस। ओना उनलक पुसिस, तुमी यहान फालतू मा दिवस भर काय लाई उभा रव्हसेव? 7 ओन्होसीन जवाब देईन, का कोनी ना आमला काम पर नही राखिन। तबा ओना उनलक कह्यो, ‘बेस से ता तुमी जाव, अना बगीचा मा काम करो।’"
8 "जबा दिवस बुड़ गयो तबा अंगूर को बगीचा को मालिक ना आपरो मुनीम ला कहीस, ‘नौकर बनिहार ला हाकल लेव अना आखरी मा लगयो नौकर लक सुरु करके जो पयले लक लगायो गयो, सबला पगार दे देव।’ 9 असो परकार जोन नौकर बनिहार पील-पील दिवस मा काम मा लगयो होतिन, उनमा लक हरेक ला खुरो को एक रुपया मिलयो। 10 तबा जोन पुढा आई होतीन उनना यो समझीन का हम ला लगत भेटेत। पर उन ला भी एक-एक खूरो को एक रुपया मिलयो। 11 उनना रुपया तो धर लेईन, मंग वय जमींदार पर कुड़कुड़ान लगीन। 12 उनना कहिन, ‘एक तास काम करनवालो ला ओतरो च पगार देईसेस, जेतरो आमीला भी देईसेस, जबकि आमी ता कड़कड़ातो ऊन मा दिवस भर काम करया सेजन।’ "
13 ओना मालक ना जवाब देइस, "‘अरे संगी, मि तुमरो काही हानी भयी का? का तुना मोरो लक एक खुरो को सिक्का बिनी नही ठहरायो होतो? ’ 14 जोन तोरो से उचल ले, अना पराय जाय। मोरी मरजी या से की जेतरो तोला देहुँ, वोतरोच मंघा वालो ला भी देहुँ। 15 का यो साजरो नहात? का मि आपरो माल ला जसो चाहुँ वसोच करुँ, का मोरो नेकी ला तु बुरो चोवोसेस?" 16 20:16 मत्ती 19:30; मरकुस 10:31; लूका 13:30 याच रिती लक जो मंघा सेत वय पुढा होहेत। अना जो पुढा सेत वय मंघा होहेत।