42 यो काजी तुमी जगत रव्हो अना पिराथना करत जावो, काहेका तुमीला यो मालुम नाहत का, खेत का मालिक मजे पिरभु कबा आवनवारो सेत।
42 यो काजी तुमी जगत रव्हो अना पिराथना करत जावो, काहेका तुमीला यो मालुम नाहत का, खेत का मालिक मजे पिरभु कबा आवनवारो सेत।