पुनरुत्थान बारी सरीर
35 अब कोई जौ कहेगो, "कि मुर्दा कौन सी रीति से जी उठथैं? और कौन सी सरीर के संग आथैं?" 36 अरे बेअकली! जो कछु तू बोथै, बहे दानो जबले नाय मरै जिंदो नाय होथै। 37 और जो तैं बोथै, जौ बौ सरीर नाय जो पैदा होन बारी है, पर सिरफ गूदा है, तुम जमीन मैं पौधा नाय दानोंई बोथौ, चाँहे गेंहूँ को, चाँहे कछु और अनाज को। 38 लेकिन परमेस्वर जैसो चाहथै, बैसिये रूप बाकै दै देथै। सबै बीज कै बौ उनकै उनकोई सरीर दै देथै।
42 मुर्दा को पुनरुत्थान हुई जानो ऐसोई है। सरीर जो है नासवान की हालत मैं बोई जाथै और अविनासी रूप मैं जी उठथै। 43 बौ अनादर के संग बोई जाथै, और महिमा मैं जी उठथै; बिना बल के संग बोई जाथै; और सामर्थ्य के संग जी उठथै। 44 जब इंसान दफन करो जाथै, तौ एक भौतिक सरीर है; जब जी उठाओ जागो, तौ जौ एक आत्मिक सरीर होगो। बेसक, एक भौतिक सरीर है, इसलै आत्मिक सरीरौ है।