9 मैं अपनी चिट्ठी मैं तुमकै लिखो हौं, की व्यभिचारियन की संगती मत रखियो। 10 जौ नाय, कि तुम कतईये जौ दुनिया के व्यभिचारियन, लालचिन, अंधेर करन बारे, या मूर्ति पूजा करन बारेन की संगती करन कै बाध्य बनौ; काहैकि जौ हाल मैं तौ तुमकै दुनिया मैं से निकर जानो चाहिए।
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