3 तुमकै खुदकै सुगड़ बनान के ताहीं बहारी सुगड़पन की जरूरत नाय है, जैसी कि तुम अपने बारन कै करथौ, या तुमरे जरिया पैंधे गै जेबर, या तुमरे जरिया पैंधे जान बारे लत्ता। 4 जाके अलावा तुमरो लुको भौ और गुप्त इंसानियत, भोलोपन और मन की सांत आत्मा की दीनता की अविनासी सजावट से समरो रहबै, काहैकि परमेस्वर की नजर मैं जाको मोल बड़ो है।
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