18 अपने आपकै कोई ऐसे आदमी के जरिये दोसी ना ठहरान देमैं, जो खास दर्सन के बजह से बड़ो होन को दाबा करथै और जो झूठी विनम्रता और स्वर्गदूतन की उपासना करन मैं जोर देथै। अकारड़ ही, ऐसे लोग अपनी मानवीय सोच से फूले ना समाए रै हैं। 19 मूड़ जो मसीह है बाकै पकड़े नाय रहथैं जोसे सारो सरीर जोड़ो और पट्ठो से पालन-पोसँड़ पाएकै एक संग गठकै, परमेस्वर के घाँईं से बढ़तै जाथै।
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