15 जाके बजाय, प्यार की आत्मा मैं सच बोलकै, हमकै हर तरह से मसीह के ताहीं बढ़नो चाहिए, जो मुड़िया है। 16 बाके बस मैं सरीर के सबै अलग-अलग हिस्सा एक संग ठीक तरीका से बैठे होथैं, और पूरे सरीर कै एक संग हर जोर गाँठ से रखो जाथै, जैसे कि होनो चाहिए तभई जब हर अलग हिस्सा काम करथै तौ पूरो सरीर बढ़थै, कि बौ प्रेम मैं उन्नति करत जाए।