3 स्वार्थी इच्छा से या घमंड करन की सस्ती इच्छा से कछु मत करौ, लेकिन एक दुसरे के प्रति विनम्र रहबौ, हमेसा दुसरेन कै अपने आप से अच्छो मानौं। 4 और एक दुसरेन के हित की सोचैं, ना कि खाली अपने बारे मैं। 5 जैसो ईसु मसीह को स्वभाव रहै बैसिये तुमरो भी स्वभाव और सोच होबै: