3 फिर बौ उन्हैं कहानी मैं भौत सी बात बताई, और कही: एक किसान बीज बोन निकरो। 4 जब बौ बीज कै खेत मैं बिखेरी, तौ बाको कुछ भाग रस्ता के किनारे गिरे, और पक्छी आयकै उनकै खाए गै। 5 बाको कुछ भाग पथरीली जमीन मैं गिरे, जहाँ थोड़ी सी मट्टी रहै। बीज जल्दिये ही अंकुरित ही गै, काहैकि मट्टी गहरी नाय रहै। 6 पर जब सूरज निकरो, बौ अंकुरित पौधन कै जलाए दई; काहैकि जड़ गहरी नाय रहैं, पौधा जल्दिये सूख गै। 7 कुछ बीज कटीली झाड़िन के बीच गिरे, जो बड़े भै और पौधन कै दबाय दई। 8 पर कुछ बीज अच्छी जघा मैं गिरे, और फल लाईं, कोई सौ गुना, कोई साठ गुना, कोई तीस गुना। 9 और ईसु हल निकारी, "सुनौ, जोके कान होमैं बौ सुन लियौ।"