अशाए-रब्बानी
17 मैं आपको एक और हिदायत देता हूँ। लेकिन इस सिलसिले में मेरे पास आपके लिए तारीफ़ी अलफ़ाज़ नहीं, क्योंकि आपका जमा होना आपकी बेहतरी का बाइस नहीं होता बल्कि नुक़सान का बाइस। 18 अव्वल तो मैं सुनता हूँ कि जब आप जमात की सूरत में इकट्ठे होते हैं तो आपके दरमियान पार्टीबाज़ी नज़र आती है। और किसी हद तक मुझे इसका यक़ीन भी है।