4रब रास्त है। उसने बेदीनों के रस्से काटकर मुझे आज़ाद कर दिया है।
5अल्लाह करे कि जितने भी सिय्यून से नफ़रत रखें वह शरमिंदा होकर पीछे हट जाएँ।
8जो भी उनसे गुज़रे वह न कहे, "रब तुम्हें बरकत दे।"हम रब का नाम लेकर तुम्हें बरकत देते हैं!
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4रब रास्त है। उसने बेदीनों के रस्से काटकर मुझे आज़ाद कर दिया है।
5अल्लाह करे कि जितने भी सिय्यून से नफ़रत रखें वह शरमिंदा होकर पीछे हट जाएँ।
8जो भी उनसे गुज़रे वह न कहे, "रब तुम्हें बरकत दे।"हम रब का नाम लेकर तुम्हें बरकत देते हैं!
5इलिऊज़ी, यरीमोत, बालियाह, समरियाह और सफ़तियाह ख़रूफ़ी।
11अत्ती, इलियेल,
12यूहनान, इल्ज़बद,
2ऐ रब, मुझ पर रहम कर, क्योंकि मैं निढाल हूँ। ऐ रब, मुझे शफ़ा दे, क्योंकि मेरे आज़ा दहशतज़दा हैं।
4ऐ रब, वापस आकर मेरी जान को बचा। अपनी शफ़क़त की ख़ातिर मुझे छुटकारा दे।
5क्योंकि मुरदा तुझे याद नहीं करता। पाताल में कौन तेरी सताइश करेगा?
22ऊबाल, अबीमाएल, सबा,
26सरूज, नहूर, तारह
52उहलीबामा, ऐला, फ़ीनोन,
5अपनी राह रब के सुपुर्द कर। उस पर भरोसा रख तो वह तुझे कामयाबी बख़्शेगा।
27बुराई से बाज़ आकर भलाई कर। तब तू हमेशा के लिए मुल्क में आबाद रहेगा,
40रब ही उनकी मदद करके उन्हें छुटकारा देगा, वही उन्हें बेदीनों से बचाकर नजात देगा। क्योंकि उन्होंने उसमें पनाह ली है।
3रब अज़ीम और बड़ी तारीफ़ के लायक़ है। उस की अज़मत इनसान की समझ से बाहर है।
8रब मेहरबान और रहीम है। वह तहम्मुल और शफ़क़त से भरपूर है।
14रब तमाम गिरनेवालों का सहारा है। जो भी दब जाए उसे वह उठा खड़ा करता है।