5इबहार, इलीसुअ, इल्फ़लत,
6नौजा, नफ़ज, यफ़ीअ,
7इलीसमा, बाल-यदा और इलीफ़लत।
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5इबहार, इलीसुअ, इल्फ़लत,
6नौजा, नफ़ज, यफ़ीअ,
7इलीसमा, बाल-यदा और इलीफ़लत।
9रब में पनाह लेना शुरफ़ा पर एतमाद करने से कहीं बेहतर है।
25ऐ रब, मेहरबानी करके हमें बचा! ऐ रब, मेहरबानी करके कामयाबी अता फ़रमा!
26मुबारक है वह जो रब के नाम से आता है। रब की सुकूनतगाह से हम तुम्हें बरकत देते हैं।
5रब मेहरबान और रास्त है, हमारा ख़ुदा रहीम है।
6रब सादा लोगों की हिफ़ाज़त करता है। जब मैं पस्तहाल था तो उसने मुझे बचाया।
7ऐ मेरी जान, अपनी आरामगाह के पास वापस आ, क्योंकि रब ने तेरे साथ भलाई की है।
5अपनी राह रब के सुपुर्द कर। उस पर भरोसा रख तो वह तुझे कामयाबी बख़्शेगा।
27बुराई से बाज़ आकर भलाई कर। तब तू हमेशा के लिए मुल्क में आबाद रहेगा,
40रब ही उनकी मदद करके उन्हें छुटकारा देगा, वही उन्हें बेदीनों से बचाकर नजात देगा। क्योंकि उन्होंने उसमें पनाह ली है।
20अगर हम अपने ख़ुदा का नाम भूलकर अपने हाथ किसी और माबूद की तरफ़ उठाते
23ऐ रब, जाग उठ! तू क्यों सोया हुआ है? हमें हमेशा के लिए रद्द न कर बल्कि हमारी मदद करने के लिए खड़ा हो जा।
26उठकर हमारी मदद कर! अपनी शफ़क़त की ख़ातिर फ़िद्या देकर हमें छुड़ा!
4रब रास्त है। उसने बेदीनों के रस्से काटकर मुझे आज़ाद कर दिया है।
5अल्लाह करे कि जितने भी सिय्यून से नफ़रत रखें वह शरमिंदा होकर पीछे हट जाएँ।
8जो भी उनसे गुज़रे वह न कहे, "रब तुम्हें बरकत दे।"हम रब का नाम लेकर तुम्हें बरकत देते हैं!