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Resultados da busca por "amor"

19 resultados encontrados

  1. 2 João 1

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 1
    Mostrando versículos 3–12 de 13

    3ख़ुदा बाप और बाप का फ़रज़ंद ईसा मसीह हमें फ़ज़ल, रहम और सलामती अता करे। और यह चीज़ें सच्चाई और मुहब्बत की रूह में हमें हासिल हों।

    6मुहब्बत का मतलब यह है कि हम उसके अहकाम के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारें। जिस तरह आपने शुरू ही से सुना है, उसका हुक्म यह है कि आप मुहब्बत की रूह में चलें।

    12मैं आपको बहुत कुछ बताना चाहता हूँ, लेकिन काग़ज़ और स्याही के ज़रीए नहीं। इसके बजाए मैं आपसे मिलने और आपके रूबरू बात करने की उम्मीद रखता हूँ। फिर हमारी ख़ुशी मुकम्मल हो जाएगी।

  2. 1 Crônicas 6

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 6
    Mostrando versículos 53–73 de 81

    53अख़ीतूब के सदोक़, सदोक़ के अख़ीमाज़।

    69ऐयालोन और जात-रिम्मोन।

    73रामात और आनीम।

  3. 1 Coríntios 14

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 14
    Mostrando versículos 1–32 de 40

    1मुहब्बत का दामन थामे रखें। लेकिन साथ ही रूहानी नेमतों को सरगरमी से इस्तेमाल में लाएँ, ख़ुसूसन नबुव्वत की नेमत को।

    16अगर आप सिर्फ़ रूह में हम्दो-सना करें तो हाज़िरीन में से जो आपकी बात नहीं समझता वह किस तरह आपकी शुक्रगुज़ारी पर "आमीन" कह सकेगा? उसे तो आपकी बातों की समझ ही नहीं आई।

    32नबियों की रूहें नबियों के ताबे रहती हैं,

  4. 1 João 4

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 4
    Mostrando versículos 7–18 de 21

    7अज़ीज़ो, आएँ हम एक दूसरे से मुहब्बत रखें। क्योंकि मुहब्बत अल्लाह की तरफ़ से है, और जो मुहब्बत रखता है वह अल्लाह से पैदा होकर उसका फ़रज़ंद बन गया है और अल्लाह को जानता है।

    16और ख़ुद हमने वह मुहब्बत जान ली है और उस पर ईमान लाए हैं जो अल्लाह हमसे रखता है।अल्लाह मुहब्बत ही है। जो भी मुहब्बत में क़ायम रहता है वह अल्लाह में रहता है और अल्लाह उसमें।

    18मुहब्बत में ख़ौफ़ नहीं होता बल्कि कामिल मुहब्बत ख़ौफ़ को भगा देती है, क्योंकि ख़ौफ़ के पीछे सज़ा का डर है। जो डरता है उस की मुहब्बत तकमील तक नहीं पहुँची।

  5. 1 Coríntios 16

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 16
    Mostrando versículos 14–22 de 24

    14सब कुछ मुहब्बत से करें।

    20तमाम भाई आपको सलाम कहते हैं। एक दूसरे को मुक़द्दस बोसा देते हुए सलाम कहें।

    22लानत उस शख़्स पर जो ख़ुदावंद से मुहब्बत नहीं रखता।ऐ हमारे ख़ुदावंद, आ!

  6. Mateus 5

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 5
    Mostrando versículos 12–46 de 48

    12ख़ुशी मनाओ और बाग़ बाग़ हो जाओ, तुमको आसमान पर बड़ा अज्र मिलेगा। क्योंकि इसी तरह उन्होंने तुमसे पहले नबियों को भी ईज़ा पहुँचाई थी।

    43तुमने सुना है कि फ़रमाया गया है, ‘अपने पड़ोसी से मुहब्बत रखना और अपने दुश्मन से नफ़रत करना।’

    46अगर तुम सिर्फ़ उन्हीं से मुहब्बत करो जो तुमसे करते हैं तो तुमको क्या अज्र मिलेगा? टैक्स लेनेवाले भी तो ऐसा ही करते हैं।

  7. Rute 4

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 4
    Mostrando versículos 19–21 de 22

    19राम, अम्मीनदाब,

    20नहसोन, सलमोन,

    21बोअज़, ओबेद,

  8. 1 Pedro 5

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 5
    Mostrando versículos 9–14 de 14

    9ईमान में मज़बूत रहकर उसका मुक़ाबला करें। आपको तो मालूम है कि पूरी दुनिया में आपके भाई इसी क़िस्म का दुख उठा रहे हैं।

    11अबद तक क़ुदरत उसी को हासिल रहे। आमीन।

    14एक दूसरे को मुहब्बत का बोसा देना।आप सबकी जो मसीह में हैं सलामती हो।

  9. Romanos 13

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 13
    Mostrando versículos 8–13 de 14

    8किसी के भी क़र्ज़दार न रहें। सिर्फ़ एक क़र्ज़ है जो आप कभी नहीं उतार सकते, एक दूसरे से मुहब्बत रखने का क़र्ज़। यह करते रहें क्योंकि जो दूसरों से मुहब्बत रखता है उसने शरीअत के तमाम तक़ाज़े पूरे किए हैं।

    10जो किसी से मुहब्बत रखता है वह उससे ग़लत सुलूक नहीं करता। यों मुहब्बत शरीअत के तमाम तक़ाज़े पूरे करती है।

    13हम शरीफ़ ज़िंदगी गुज़ारें, ऐसे लोगों की तरह जो दिन की रौशनी में चलते हैं। इसलिए लाज़िम है कि हम इन चीज़ों से बाज़ रहें : बदमस्तों की रंगरलियों और शराबनोशी से, ज़िनाकारी और ऐयाशी से, और झगड़े और हसद से।

  10. Romanos 12

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 12
    Mostrando versículos 9–16 de 21

    9आपकी मुहब्बत महज़ दिखावे की न हो। जो कुछ बुरा है उससे नफ़रत करें और जो कुछ अच्छा है उसके साथ लिपटे रहें।

    10आपकी एक दूसरे के लिए बरादराना मुहब्बत सरगरम हो। एक दूसरे की इज़्ज़त करने में आप ख़ुद पहला क़दम उठाएँ।

    16एक दूसरे के साथ अच्छे ताल्लुक़ात रखें। ऊँची सोच न रखें बल्कि दबे हुओं से रिफ़ाक़त रखें। अपने आपको दाना मत समझें।

  11. Neemias 11

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 11
    Mostrando versículos 29–34 de 36

    29ऐन-रिम्मोन, सुरआ, यरमूत,

    33हसूर, रामा, जित्तैम,

    34हादीद, ज़बोईम, नबल्लात,

  12. Provérbios 27

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 27
    Mostrando versículos 5–9 de 27

    5खुली मलामत छुपी हुई मुहब्बत से बेहतर है।

    6प्यार करनेवाले की ज़रबें वफ़ा का सबूत हैं, लेकिन नफ़रत करनेवाले के मुतअद्दिद बोसों से ख़बरदार रह।

    9तेल और बख़ूर दिल को ख़ुश करते हैं, लेकिन दोस्त अपने अच्छे मशवरों से ख़ुशी दिलाता है।

  13. João 15

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 15
    Mostrando versículos 9–17 de 27

    9जिस तरह बाप ने मुझसे मुहब्बत रखी है उसी तरह मैंने तुमसे भी मुहब्बत रखी है। अब मेरी मुहब्बत में क़ायम रहो।

    10जब तुम मेरे अहकाम के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारते हो तो तुम मेरी मुहब्बत में क़ायम रहते हो। मैं भी इसी तरह अपने बाप के अहकाम के मुताबिक़ चलता हूँ और यों उस की मुहब्बत में क़ायम रहता हूँ।

    17मेरा हुक्म यही है कि एक दूसरे से मुहब्बत रखो।

  14. Josué 15

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 15
    Mostrando versículos 26–50 de 63

    26अमाम, समा, मोलादा,

    29बाला, इय्यीम, अज़म,

    50अनाब, इस्तमोह, अनीम,

  15. 1 Crônicas 1

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 1
    Mostrando versículos 16–52 de 54

    16अरवादी, समारी और हमाती।

    27और अब्राम यानी इब्राहीम।

    52उहलीबामा, ऐला, फ़ीनोन,

  16. Eclesiastes 3

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 3
    Mostrando versículos 4–8 de 22

    4रोने और हँसने का,आहें भरने और रक़्स करने का,

    6तलाश करने और खो देने का,महफ़ूज़ रखने और फेंकने का,

    8प्यार करने और नफ़रत करने का,जंग लड़ने और सलामती से ज़िंदगी गुज़ारने का,

  17. Esdras 2

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 2
    Mostrando versículos 46–57 de 70

    46हजाब, शलमी, हनान,

    50अस्ना, मऊनीम, नफ़ूसीम,

    57सफ़तियाह, ख़त्तील, फ़ूकिरत-ज़बायम और अमी।

  18. Josué 19

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 19
    Mostrando versículos 3–43 de 51

    3हसार-सुआल, बाला, अज़म,

    36अदामा, रामा, हसूर,

    43ऐलोन, तिमनत, अक़रून,

  19. 1 Coríntios 13

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 13
    Mostrando versículos 4–8 de 13

    4मुहब्बत सब्र से काम लेती है, मुहब्बत मेहरबान है। न यह हसद करती है न डींगें मारती है। यह फूलती भी नहीं।

    5मुहब्बत बदतमीज़ी नहीं करती न अपने ही फ़ायदे की तलाश में रहती है। यह जल्दी से ग़ुस्से में नहीं आ जाती और दूसरों की ग़लतियों का रिकार्ड नहीं रखती।

    8मुहब्बत कभी ख़त्म नहीं होती। इसके मुक़ाबले में नबुव्वतें ख़त्म हो जाएँगी, ग़ैरज़बानें जाती रहेंगी, इल्म मिट जाएगा।

Léxico (correspondência exata) Semântico (correspondência relacionada) Versículos omitidos Contexto do capítulo