Pular para o conteúdo
Publicidade

Resultados da busca por "amor"

26 resultados encontrados

  1. 2 João 1

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 1
    Mostrando versículos 3–12 de 13

    3ख़ुदा बाप और बाप का फ़रज़ंद ईसा मसीह हमें फ़ज़ल, रहम और सलामती अता करे। और यह चीज़ें सच्चाई और मुहब्बत की रूह में हमें हासिल हों।

    6मुहब्बत का मतलब यह है कि हम उसके अहकाम के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारें। जिस तरह आपने शुरू ही से सुना है, उसका हुक्म यह है कि आप मुहब्बत की रूह में चलें।

    12मैं आपको बहुत कुछ बताना चाहता हूँ, लेकिन काग़ज़ और स्याही के ज़रीए नहीं। इसके बजाए मैं आपसे मिलने और आपके रूबरू बात करने की उम्मीद रखता हूँ। फिर हमारी ख़ुशी मुकम्मल हो जाएगी।

  2. 1 Coríntios 13

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 13
    Mostrando versículos 4–13 de 13

    4मुहब्बत सब्र से काम लेती है, मुहब्बत मेहरबान है। न यह हसद करती है न डींगें मारती है। यह फूलती भी नहीं।

    8मुहब्बत कभी ख़त्म नहीं होती। इसके मुक़ाबले में नबुव्वतें ख़त्म हो जाएँगी, ग़ैरज़बानें जाती रहेंगी, इल्म मिट जाएगा।

    13ग़रज़ ईमान, उम्मीद और मुहब्बत तीनों क़ायम रहते हैं, लेकिन इनमें अफ़ज़ल मुहब्बत है।

  3. Rute 4

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 4
    Mostrando versículos 19–21 de 22

    19राम, अम्मीनदाब,

    20नहसोन, सलमोन,

    21बोअज़, ओबेद,

  4. Romanos 12

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 12
    Mostrando versículos 9–16 de 21

    9आपकी मुहब्बत महज़ दिखावे की न हो। जो कुछ बुरा है उससे नफ़रत करें और जो कुछ अच्छा है उसके साथ लिपटे रहें।

    10आपकी एक दूसरे के लिए बरादराना मुहब्बत सरगरम हो। एक दूसरे की इज़्ज़त करने में आप ख़ुद पहला क़दम उठाएँ।

    16एक दूसरे के साथ अच्छे ताल्लुक़ात रखें। ऊँची सोच न रखें बल्कि दबे हुओं से रिफ़ाक़त रखें। अपने आपको दाना मत समझें।

  5. Romanos 13

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 13
    Mostrando versículos 4–10 de 14

    4क्योंकि वह अल्लाह का ख़ादिम है जो आपकी बेहतरी के लिए ख़िदमत करता है। लेकिन अगर आप ग़लत काम करें तो डरें, क्योंकि वह अपनी तलवार को ख़ाहमख़ाह थामे नहीं रखता। वह अल्लाह का ख़ादिम है और उसका ग़ज़ब ग़लत काम करनेवाले पर नाज़िल होता है।

    8किसी के भी क़र्ज़दार न रहें। सिर्फ़ एक क़र्ज़ है जो आप कभी नहीं उतार सकते, एक दूसरे से मुहब्बत रखने का क़र्ज़। यह करते रहें क्योंकि जो दूसरों से मुहब्बत रखता है उसने शरीअत के तमाम तक़ाज़े पूरे किए हैं।

    10जो किसी से मुहब्बत रखता है वह उससे ग़लत सुलूक नहीं करता। यों मुहब्बत शरीअत के तमाम तक़ाज़े पूरे करती है।

  6. 1 Crônicas 6

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 6
    Mostrando versículos 53–73 de 81

    53अख़ीतूब के सदोक़, सदोक़ के अख़ीमाज़।

    69ऐयालोन और जात-रिम्मोन।

    73रामात और आनीम।

  7. Neemias 11

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 11
    Mostrando versículos 29–34 de 36

    29ऐन-रिम्मोन, सुरआ, यरमूत,

    33हसूर, रामा, जित्तैम,

    34हादीद, ज़बोईम, नबल्लात,

  8. 1 Coríntios 14

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 14
    Mostrando versículos 1–16 de 40

    1मुहब्बत का दामन थामे रखें। लेकिन साथ ही रूहानी नेमतों को सरगरमी से इस्तेमाल में लाएँ, ख़ुसूसन नबुव्वत की नेमत को।

    4ग़ैरज़बान बोलनेवाला अपनी तामीरो-तरक़्क़ी करता है जबकि नबुव्वत करनेवाला जमात की।

    16अगर आप सिर्फ़ रूह में हम्दो-सना करें तो हाज़िरीन में से जो आपकी बात नहीं समझता वह किस तरह आपकी शुक्रगुज़ारी पर "आमीन" कह सकेगा? उसे तो आपकी बातों की समझ ही नहीं आई।

  9. 1 Pedro 5

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 5
    Mostrando versículos 9–14 de 14

    9ईमान में मज़बूत रहकर उसका मुक़ाबला करें। आपको तो मालूम है कि पूरी दुनिया में आपके भाई इसी क़िस्म का दुख उठा रहे हैं।

    11अबद तक क़ुदरत उसी को हासिल रहे। आमीन।

    14एक दूसरे को मुहब्बत का बोसा देना।आप सबकी जो मसीह में हैं सलामती हो।

  10. 1 João 4

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 4
    Mostrando versículos 7–18 de 21

    7अज़ीज़ो, आएँ हम एक दूसरे से मुहब्बत रखें। क्योंकि मुहब्बत अल्लाह की तरफ़ से है, और जो मुहब्बत रखता है वह अल्लाह से पैदा होकर उसका फ़रज़ंद बन गया है और अल्लाह को जानता है।

    16और ख़ुद हमने वह मुहब्बत जान ली है और उस पर ईमान लाए हैं जो अल्लाह हमसे रखता है।अल्लाह मुहब्बत ही है। जो भी मुहब्बत में क़ायम रहता है वह अल्लाह में रहता है और अल्लाह उसमें।

    18मुहब्बत में ख़ौफ़ नहीं होता बल्कि कामिल मुहब्बत ख़ौफ़ को भगा देती है, क्योंकि ख़ौफ़ के पीछे सज़ा का डर है। जो डरता है उस की मुहब्बत तकमील तक नहीं पहुँची।

  11. Provérbios 27

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 27
    Mostrando versículos 5–19 de 27

    5खुली मलामत छुपी हुई मुहब्बत से बेहतर है।

    6प्यार करनेवाले की ज़रबें वफ़ा का सबूत हैं, लेकिन नफ़रत करनेवाले के मुतअद्दिद बोसों से ख़बरदार रह।

    19जिस तरह पानी चेहरे को मुनअकिस करता है उसी तरह इनसान का दिल इनसान को मुनअकिस करता है।

  12. Esdras 2

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 2
    Mostrando versículos 46–57 de 70

    46हजाब, शलमी, हनान,

    50अस्ना, मऊनीम, नफ़ूसीम,

    57सफ़तियाह, ख़त्तील, फ़ूकिरत-ज़बायम और अमी।

  13. João 15

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 15
    Mostrando versículos 9–17 de 27

    9जिस तरह बाप ने मुझसे मुहब्बत रखी है उसी तरह मैंने तुमसे भी मुहब्बत रखी है। अब मेरी मुहब्बत में क़ायम रहो।

    10जब तुम मेरे अहकाम के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारते हो तो तुम मेरी मुहब्बत में क़ायम रहते हो। मैं भी इसी तरह अपने बाप के अहकाम के मुताबिक़ चलता हूँ और यों उस की मुहब्बत में क़ायम रहता हूँ।

    17मेरा हुक्म यही है कि एक दूसरे से मुहब्बत रखो।

  14. Mateus 5

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 5
    Mostrando versículos 14–46 de 48

    14तुम दुनिया की रौशनी हो। पहाड़ पर वाक़े शहर की तरह तुमको छुपाया नहीं जा सकता।

    34लेकिन मैं तुम्हें बताता हूँ, क़सम बिलकुल न खाना। न ‘आसमान की क़सम’ क्योंकि आसमान अल्लाह का तख़्त है,

    46अगर तुम सिर्फ़ उन्हीं से मुहब्बत करो जो तुमसे करते हैं तो तुमको क्या अज्र मिलेगा? टैक्स लेनेवाले भी तो ऐसा ही करते हैं।

  15. Cânticos 7

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 7
    Mostrando versículos 5–12 de 13

    5तेरा सर कोहे-करमिल की मानिंद है, तेरे खुले बाल अरग़वान की तरह क़ीमती और दिलकश हैं। बादशाह तेरी ज़ुल्फ़ों की ज़ंजीरों में जकड़ा रहता है।

    6ऐ ख़ुशियों से लबरेज़ मुहब्बत, तू कितनी हसीन है, कितनी दिलरुबा!

    12आ, हम सुबह-सवेरे अंगूर के बाग़ों में जाकर मालूम करें कि क्या बेलों से कोंपलें निकल आई हैं और फूल लगे हैं, कि क्या अनार के दरख़्त खिल रहे हैं। वहाँ मैं तुझ पर अपनी मुहब्बत का इज़हार करूँगी।

  16. Josué 18

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 18
    Mostrando versículos 22–27 de 28

    22बैत-अराबा, समरैम, बैतेल,

    23अव्वीम, फ़ारा, उफ़रा,

    27रक़म, इर्फ़एल, तराला,

  17. Judas 1

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 1
    Mostrando versículos 2–22 de 25

    2अल्लाह आपको रहम, सलामती और मुहब्बत कसरत से अता करे।

    21अपने आपको अल्लाह की मुहब्बत में क़ायम रखें और इस इंतज़ार में रहें कि हमारे ख़ुदावंद ईसा मसीह का रहम आपको अबदी ज़िंदगी तक पहुँचाए।

    22उन पर रहम करें जो शक में पड़े हैं।

  18. Filipenses 4

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 4
    Mostrando versículos 4–20 de 23

    4हर वक़्त ख़ुदावंद में ख़ुशी मनाएँ। एक बार फिर कहता हूँ, ख़ुशी मनाएँ।

    5आपकी नरमदिली तमाम लोगों पर ज़ाहिर हो। याद रखें कि ख़ुदावंद आने को है।

    20अल्लाह हमारे बाप का जलाल अज़ल से अबद तक हो। आमीन।

  19. Josué 15

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 15
    Mostrando versículos 26–50 de 63

    26अमाम, समा, मोलादा,

    29बाला, इय्यीम, अज़म,

    50अनाब, इस्तमोह, अनीम,

  20. Salmos 135

    किताबे-मुक़द्दस
    Capítulo 135
    Mostrando versículos 1–21 de 21

    1रब की हम्द हो! रब के नाम की सताइश करो! उस की तमजीद करो, ऐ रब के तमाम ख़ादिमो,

    3रब की हम्द करो, क्योंकि रब भला है। उसके नाम की मद्हसराई करो, क्योंकि वह प्यारा है।

    21सिय्यून से रब की हम्द हो। उस की हम्द हो जो यरूशलम में सुकूनत करता है। रब की हम्द हो!

Léxico (correspondência exata) Semântico (correspondência relacionada) Versículos omitidos Contexto do capítulo