मौत से ज़िंदगी तक
1 आप भी अपनी ख़ताओं और गुनाहों की वजह से रूहानी तौर पर मुरदा थे।
4 लेकिन अल्लाह का रहम इतना वसी है और वह इतनी शिद्दत से हमसे मुहब्बत रखता है 5 कि अगरचे हम अपने गुनाहों में मुरदा थे तो भी उसने हमें मसीह के साथ ज़िंदा कर दिया। हाँ, आपको अल्लाह के फ़ज़ल ही से नजात मिली है। 8 क्योंकि यह उसका फ़ज़ल ही है कि आपको ईमान लाने पर नजात मिली है। यह आपकी तरफ़ से नहीं है बल्कि अल्लाह की बख़्शिश है। 9 और यह नजात हमें अपने किसी काम के नतीजे में नहीं मिली, इसलिए कोई अपने आप पर फ़ख़र नहीं कर सकता। 10 हाँ, हम उसी की मख़लूक़ हैं जिन्हें उसने मसीह में नेक काम करने के लिए ख़लक़ किया है। और यह काम उसने पहले से हमारे लिए तैयार कर रखे हैं, क्योंकि वह चाहता है कि हम उन्हें सरंजाम देते हुए ज़िंदगी गुज़ारें।