मौत से ज़िंदगी तक
1 आप भी अपनी ख़ताओं और गुनाहों की वजह से रूहानी तौर पर मुरदा थे। 2 क्योंकि पहले आप इनमें फँसे हुए इस दुनिया के तौर-तरीक़ों के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारते थे। आप हवा की कुव्वतों के सरदार के ताबे थे, उस रूह के जो इस वक़्त उनमें सरगरमे-अमल है जो अल्लाह के नाफ़रमान हैं। 3 पहले तो हम भी सब उनमें ज़िंदगी गुज़ारते थे। हम भी अपनी पुरानी फ़ितरत की शहवतें, मरज़ी और सोच पूरी करने की कोशिश करते रहे। दूसरों की तरह हम पर भी फ़ितरी तौर पर अल्लाह का ग़ज़ब नाज़िल होना था।