बदन की यगांगत
1 चुनाँचे मैं जो ख़ुदावंद में क़ैदी हूँ आपको ताकीद करता हूँ कि उस ज़िंदगी के मुताबिक़ चलें जिसके लिए ख़ुदा ने आपको बुलाया है। 2 हर वक़्त हलीम और नरमदिल रहें, सब्र से काम लें और एक दूसरे से मुहब्बत रखकर उसे बरदाश्त करें। 3 सुलह-सलामती के बंधन में रहकर रूह की यगांगत क़ायम रखने की पूरी कोशिश करें।