दाइयाँ अल्लाह की राह पर चलती हैं
15 इसराईलियों की दो दाइयाँ थीं जिनके नाम सिफ़रा और फ़ुआ थे। मिसर के बादशाह ने उनसे कहा, 16 "जब इबरानी औरतें तुम्हें मदद के लिए बुलाएँ तो ख़बरदार रहो। अगर लड़का पैदा हो तो उसे जान से मार दो, अगर लड़की हो तो उसे जीता छोड़ दो।" 17 लेकिन दाइयाँ अल्लाह का ख़ौफ़ मानती थीं। उन्होंने मिसर के बादशाह का हुक्म न माना बल्कि लड़कों को भी जीने दिया।
20 चुनाँचे अल्लाह ने दाइयों को बरकत दी, और इसराईली क़ौम तादाद में बढ़कर बहुत ताक़तवर हो गई। 21 और चूँकि दाइयाँ अल्लाह का ख़ौफ़ मानती थीं इसलिए उसने उन्हें औलाद देकर उनके ख़ानदानों को क़ायम रखा।