13 यह तमाम लोग ईमान रखते रखते मर गए। उन्हें वह कुछ न मिला जिसका वादा किया गया था। उन्होंने उसे सिर्फ़ दूर ही से देखकर ख़ुशआमदीद लफ़्ज़ी तरजुमा : सलामी दी। सलाम देकर इज़्ज़त का इज़हार किया। सल्यूट किया। कहा। और उन्होंने तसलीम किया कि हम ज़मीन पर ज़मीन पर या मुल्क (यानी कनान) में। सिर्फ़ मेहमान और आरिज़ी तौर पर रहनेवाले अजनबी हैं।
39 इन सबको ईमान की वजह से अच्छी गवाही मिली। तो भी इन्हें वह कुछ हासिल न हुआ जिसका वादा अल्लाह ने किया था।