ज़िंदगी का कलाम
1 इब्तिदा में कलाम था। कलाम अल्लाह के साथ था और कलाम अल्लाह था। 2 यही इब्तिदा में अल्लाह के साथ था। 3 सब कुछ कलाम के वसीले से पैदा हुआ। मख़लूक़ात की एक भी चीज़ उसके बग़ैर पैदा नहीं हुई।
14 कलाम इनसान बनकर हमारे दरमियान रिहाइशपज़ीर हुआ और हमने उसके जलाल का मुशाहदा किया। वह फ़ज़ल और सच्चाई से मामूर था और उसका जलाल बाप के इकलौते फ़रज़ंद का-सा था।