सच्चाई तुमको आज़ाद करेगी
31 जो यहूदी उसका यक़ीन करते थे ईसा अब उनसे हमकलाम हुआ, "अगर तुम मेरी तालीम के ताबे रहोगे तब ही तुम मेरे सच्चे शागिर्द होगे। 32 फिर तुम सच्चाई को जान लोगे और सच्चाई तुमको आज़ाद कर देगी।"
33 उन्होंने एतराज़ किया, "हम तो इब्राहीम की औलाद हैं, हम कभी भी किसी के ग़ुलाम नहीं रहे। फिर आप किस तरह कह सकते हैं कि हम आज़ाद हो जाएंगे?"
34 ईसा ने जवाब दिया, "मैं तुमको सच बताता हूँ कि जो भी गुनाह करता है वह गुनाह का ग़ुलाम है। 35 ग़ुलाम तो आरिज़ी तौर पर घर में रहता है, लेकिन मालिक का बेटा हमेशा तक। 36 इसलिए अगर फ़रज़ंद तुमको आज़ाद करे तो तुम हक़ीक़तन आज़ाद होगे।