समसून ग़ज़्ज़ा का दरवाज़ा उठा ले जाता है
1 एक दिन समसून फ़िलिस्ती शहर ग़ज़्ज़ा में आया। वहाँ वह एक कसबी को देखकर उसके घर में दाख़िल हुआ। 2 जब शहर के बाशिंदों को इत्तला मिली कि समसून शहर में है तो उन्होंने कसबी के घर को घेर लिया। साथ साथ वह रात के वक़्त शहर के दरवाज़े पर ताक में रहे। फ़ैसला यह हुआ, "रात के वक़्त हम कुछ नहीं करेंगे, जब पौ फटेगी तब उसे मार डालेंगे।"
3 समसून अब तक कसबी के घर में सो रहा था। लेकिन आधी रात को वह उठकर शहर के दरवाज़े के पास गया और दोनों किवाड़ों को कुंडे और दरवाज़े के दोनों बाज़ुओं समेत उखाड़कर अपने कंधों पर रख लिया। यों चलते चलते वह सब कुछ उस पहाड़ी की चोटी पर ले गया जो हबरून के मुक़ाबिल है।