कोढ़ से शफ़ा
40 एक आदमी ईसा के पास आया जो कोढ़ का मरीज़ था। घुटनों के बल झुककर उसने मिन्नत की, "अगर आप चाहें तो मुझे पाक-साफ़ कर सकते हैं।"
41 ईसा को तरस आया। उसने अपना हाथ बढ़ाकर उसे छुआ और कहा, "मैं चाहता हूँ, पाक-साफ़ हो जा।" 42 इस पर बीमारी फ़ौरन दूर हो गई और वह पाक-साफ़ हो गया। 43 ईसा ने उसे फ़ौरन रुख़सत करके सख़्ती से समझाया, 44 "ख़बरदार! यह बात किसी को न बताना बल्कि बैतुल-मुक़द्दस में इमाम के पास जा ताकि वह तेरा मुआयना करे। अपने साथ वह क़ुरबानी ले जा जिसका तक़ाज़ा मूसा की शरीअत उनसे करती है जिन्हें कोढ़ से शफ़ा मिली हो। यों अलानिया तसदीक़ हो जाएगी कि तू वाक़ई पाक-साफ़ हो गया है।"
45 आदमी चला गया, लेकिन वह हर जगह अपनी कहानी सुनाने लगा। उसने यह ख़बर इतनी फैलाई कि ईसा खुले तौर पर किसी भी शहर में दाख़िल न हो सका बल्कि उसे वीरान जगहों में रहना पड़ा। लेकिन वहाँ भी लोग हर जगह से उसके पास पहुँच गए।