हर दरख़्त का अपना फल होता है
15 झूटे नबियों से ख़बरदार रहो! गो वह भेड़ों का भेस बदलकर तुम्हारे पास आते हैं, लेकिन अंदर से वह ग़ारतगर भेड़िये होते हैं। 16 उनका फल देखकर तुम उन्हें पहचान लोगे। क्या ख़ारदार झाड़ियों से अंगूर तोड़े जाते हैं या ऊँटकटारों से अंजीर? हरगिज़ नहीं। 17 इसी तरह अच्छा दरख़्त अच्छा फल लाता है और ख़राब दरख़्त ख़राब फल। 18 न अच्छा दरख़्त ख़राब फल ला सकता है, न ख़राब दरख़्त अच्छा फल। 19 जो भी दरख़्त अच्छा फल नहीं लाता उसे काटकर आग में झोंका जाता है। 20 यों तुम उनका फल देखकर उन्हें पहचान लोगे।