शेख़ी मत मारना
13 और अब मेरी बात सुनें, आप जो कहते हैं, "आज या कल हम फ़ुलाँ फ़ुलाँ शहर में जाएंगे। वहाँ हम एक साल ठहरकर कारोबार करके पैसे कमाएँगे।" 14 देखें, आप यह भी नहीं जानते कि कल क्या होगा। आपकी ज़िंदगी चीज़ ही किया है! आप भाप ही हैं जो थोड़ी देर के लिए नज़र आती, फिर ग़ायब हो जाती है। 15 बल्कि आपको यह कहना चाहिए, "अगर ख़ुदावंद की मरज़ी हुई तो हम जिएँगे और यह या वह करेंगे।"