Consequências dos nossos atos: o que colhemos
O que a Bíblia ensina sobre as consequências dos nossos atos
A Bíblia ensina que nenhuma ação acontece no vazio: cada escolha produz resultados imediatos e terá uma prestação de contas definitiva diante de Deus. O que você faz, decide ou fala gera frutos inevitáveis para a sua vida e para a vida de quem está ao redor.
A responsabilidade por essas consequências é sempre pessoal. Ninguém responde pelas faltas de outro, nem colhe de forma passiva aquilo que não plantou.
ज्यांतै म्हारै म्ह तै हरेक नै अपणे-अपणे काम का लेक्खा परमेसवर ताहीं देणा पड़ैगा।(रोमियों 14:12)
परमेसवर हरेक नै उसकै काम कै मुताबिक फळ देवैगा। जो माणस भले काम करते रहवै सै, अर परमेसवर की महिमा, आदर अर अनन्त जीवन की खोज म्ह लाग्गे रहवै सै, परमेसवर उन सारया ताहीं अनन्त जीवन देवैगा। पर जो मतलबी सै अर सच नै कोनी मान्दे, बल्के अधर्म नै मान्नैं सै, उनपै परमेसवर का छो अर प्रकोप पड़ैगा। क्ळेश अर संकट हरेक माणस पै आवैगा। परमेसवर सबतै पैहल्या यहूदियाँ का अर बाद म्ह उन माणसां का न्याय करैगा जो गैर यहूदी सै। पर महिमा, आदर अर शान्ति हरेक नै मिलैगी, जो भले काम करै सै, पैहल्या यहूदी ताहीं फेर उन माणसां ताहीं जो गैर यहूदी सै। क्यूँके परमेसवर किसे का पक्षपात कोनी करदा।(रोमियों 2:6-11)
"दुसरयां पै दोष ना लाओ न्ही तो लोग थारे पै भी दोष लगावैंगे। क्यूँके जिस तरियां थम दुसरयां पै दोष लगाओ सों, उस्से तरियां परमेसवर भी थारे पै दोष लगावैगा, जिस तरियां तै थम दुसरयां का न्याय करो सों, उस्से तरियां थारा भी न्याय करया जावैगा।"(मत्ती 7:1,2)
As consequências das palavras e decisões precipitadas
As consequências não começam nos grandes erros públicos, mas na forma como você usa a fala e no discernimento antes de agir. Quem fala de forma descuidada ou assume compromissos sem avaliar o custo arca com as marcas da própria precipitação.
O princípio bíblico da prudência mostra que prever o perigo é parte da responsabilidade moral: agir por impulso traz danos que poderiam ser evitados com sabedoria.
अर मै थारे तै कहूँ सूं के जो-जो निकम्मी बात माणस कहवैगें, न्याय कै दिन वे हरेक उस बात का लेखा देवैंगे।(मत्ती 12:36)
चतुर माणस, बिप्दा नै आन्दे देखकै लुह्क जा सै;
पर भोळे माणस आग्गै बढ़कै सजा भुगतै सै।(नीतिवचन 22:3)
जै तू बुद्धिमान सै, तो बुद्धि का फळ तू ए भोग्गैगा;
अर जै तू मजाक उड़ावैगा, तो सजा भी तू हे भोग्गैगा।(नीतिवचन 9:12)
जो माणस बिना बिचारे किसे चीज नै पवित्र ठहरावै,
अर जो मन्नत मानकै पूच्छ-ताच्छ करण लाग्गै, वो फंदे म्ह फँसैगा।(नीतिवचन 20:25)
Nada do que é feito em segredo fica sem resposta
A ilusão de que certos atos não têm consequências costuma nascer do silêncio imediato: comete-se o erro e nada parece acontecer de imediato. As Escrituras tratam isso como um engano mortal.
Deus examina motivações ocultas e conhece o coração humano em profundidade. O tempo não apaga a responsabilidade moral, e a justiça divina alcança tanto a omissão quanto o ato deliberado.
क्यूँके परमेसवर का वचन जिन्दा, अर प्रभावशाली सै, अर वो एक दोधारी तलवार तै भी घणा पैना सै। वो प्राण अर आत्मा ताहीं, अर गाँठ-गाँठ अर गुद्दे-गुद्दे ताहीं न्यारा करकै आरम-पार पाड़ दे सै अर मन की भावनायां अर विचारां ताहीं परख ले सै। जिस ताहीं लेखा देणा सै, उसकी नजर तै कोए भी प्राणी छुप्या कोनी। सारी चीज उसके स्याम्ही साफ अर खुली होड़ सै।(इब्रानियों 4:12,13)
परमेसवर नै दुष्ट क्यूँ छोट्टा जाणै सै,
अर अपणे मन म्ह कहवै सै "तू लेखा न्ही लेगा?"
तन्नै देख लिया सै, क्यूँके तू उत्पात अर उत्पीडन पै नजर राक्खै सै, ताके उसका बदला अपणे हाथ म्ह राक्खै;
लाचार अपणे आप नै तेरे हाथ्थां म्ह सौंपै सै;
अनाथ्थां का तू ए मददगार रह्या सै।(भजन संहिता 10:13,14)
जै कोए इसा पाप करै, के उन काम्मां म्ह तै जिन ताहीं यहोवा नै मना करया सै किसे काम नै करै, तो चाहे वो उसतै अनजाणे म्ह होया हो, फेर भी वो कसूरवार ठहरैगा, अर उसनै अपणे अधर्म का बोझ ठाणा पड़ैगा।(लैव्यव्यवस्था 5:17)
अर पक्का मै थारा लहू यानिके प्राण का बदला ल्युँगा: सारे पशु, अर माणसां, तै मै बदला ल्यूँगा; माणस की जान का बदला मै एक-एक कै भाई-बन्धु तै ल्यूँगा।(उत्पत्ति 9:5)
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