Convicção
A convicção cristã é firmeza de fé que não se abala diante da oposição. É a certeza interior que compele a proclamar a verdade com ousadia, independentemente das consequências.
Ousadia para falar
Recebereis poder e sereis minhas testemunhas. A convicção do Espírito nos equipa para proclamar com coragem e sem vergonha.
परंतु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ्य पाओगे, और यरूशलेम में और सारे यहूदिया और सामरिया में और पृथ्वी के छोर तक मेरे साक्षी होगे।"
जब उन्होंने पतरस और यूहन्ना के साहस को देखा और यह भी जाना कि वे अनपढ़ और साधारण मनुष्य हैं तो उनको आश्चर्य हुआ, और उन्होंने पहचाना कि ये यीशु के साथ रहे हैं;
तब पतरस और प्रेरितों ने उत्तर दिया, "मनुष्यों की अपेक्षा परमेश्वर की आज्ञा मानना आवश्यक है।
और मेरे लिए भी कि जब मैं मुँह खोलूँ तो मुझे ऐसा वचन दिया जाए कि मैं साहस के साथ उस सुसमाचार का भेद प्रकट कर सकूँ, जिसके लिए मैं ज़ंजीरों में जकड़ा हुआ राजदूत हूँ, कि उसमें जैसा मुझे बोलना चाहिए साहस के साथ बोल सकूँ।
मैं सुसमाचार से लज्जित नहीं होता, क्योंकि यह प्रत्येक विश्वास करनेवाले के लिए—पहले यहूदी और फिर यूनानी के लिए—उद्धार के निमित्त परमेश्वर का सामर्थ्य है।
इस व्यभिचारी और पापी पीढ़ी में यदि कोई मुझसे और मेरे वचनों से लजाएगा, तो मनुष्य का पुत्र भी जब पवित्र स्वर्गदूतों के साथ अपने पिता की महिमा में आएगा, उससे लजाएगा।"
इसलिए तू हमारे प्रभु की साक्षी देने में और मुझसे जो उसका बंदी हूँ, लज्जित न हो, बल्कि परमेश्वर के सामर्थ्य के अनुसार सुसमाचार के लिए मेरे साथ दुःख उठा।
इन बातों को पूरे अधिकार के साथ कह, प्रोत्साहित कर और समझा। कोई तुझे तुच्छ न समझे।
Firmeza e confiança
Não temas diante dos homens. A Palavra de Deus é fogo na boca do profeta e firmeza na vida do crente.
मैं तेरी नीतियों की चर्चा राजाओं के सामने करूँगा,
और लज्जित न होऊँगा।
अन्य लोगों के बीच तुम्हारा आचरण भला रहे, ताकि वे जिस विषय में तुम्हें कुकर्मी कहकर तुम्हारी निंदा करते हैं, वे कृपादृष्टि के दिन तुम्हारे भले कार्यों को देखकर परमेश्वर की महिमा करें।
जो मनुष्य का भय मानता है वह अपने लिए जाल बिछाता है,
परंतु जो यहोवा पर भरोसा रखता है, वह सुरक्षित रहता है।
बल्कि जैसे परमेश्वर ने हमें सुसमाचार का कार्य सौंपने के योग्य समझा, हम वैसी ही बात करते हैं—मनुष्यों को प्रसन्न करने के लिए नहीं बल्कि परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए, जो हमारे मनों को जाँचता है।
"तुम जगत की ज्योति हो। पहाड़ पर स्थित नगर छिप नहीं सकता। लोग दीपक जलाकर टोकरी के नीचे नहीं बल्कि दीवट पर रखते हैं, और वह उस घर में सब लोगों को प्रकाश देता है। उसी प्रकार अपनी ज्योति को मनुष्यों के सामने चमकने दो ताकि वे तुम्हारे भले कार्यों को देखकर तुम्हारे पिता की जो स्वर्ग में है, महिमा करें।