Milagres de Jesus
Os Evangelhos registram dezenas de milagres realizados por Jesus — curas, ressurreições, domínio sobre a natureza e libertações. Cada milagre revelava sua divindade e compaixão.
Curas de cegos e surdos
Jesus devolveu a visão aos cegos e a audição aos surdos, manifestando seu poder sobre toda enfermidade e deficiência.
जब यीशु वहाँ से आगे बढ़ा, तो दो अंधे व्यक्ति चिल्लाते हुए उसके पीछे आए, "दाऊद के पुत्र, हम पर दया कर।" घर पहुँचने पर वे अंधे व्यक्ति उसके पास आए। यीशु ने उनसे कहा,"क्या तुम विश्वास करते हो कि मैं यह कर सकता हूँ?" उन्होंने उससे कहा, "हाँ, प्रभु।" तब उसने यह कहते हुए उनकी आँखें छुईं,"तुम्हारे विश्वास के अनुसार तुम्हारे लिए हो।" और उनकी आँखें खुल गईं। तब यीशु ने उन्हें कड़ी चेतावनी दी,"देखो, इस बात को कोई न जाने।" परंतु उन्होंने बाहर जाकर उस सारे प्रदेश में उसकी चर्चा फैला दी।
जब वे यरीहो से निकल रहे थे, तो एक बड़ी भीड़ उसके पीछे चल पड़ी। और देखो, मार्ग के किनारे बैठे दो अंधे व्यक्ति यह सुनकर कि यीशु वहाँ से जा रहा है, चिल्लाकर कहने लगे, "हे प्रभु, दाऊद के पुत्र, हम पर दया कर।" लोगों ने उन्हें डाँटा कि वे चुप रहें; परंतु वे और ज़ोर से चिल्लाकर कहने लगे, "हे प्रभु, दाऊद के पुत्र, हम पर दया कर।" तब यीशु ने रुककर उन्हें बुलाया और कहा,"तुम क्या चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिए करूँ?" उन्होंने उससे कहा, "प्रभु, यह कि हमारी आँखें खुल जाएँ।" यीशु ने तरस खाकर उनकी आँखों को छुआ, और वे तुरंत देखने लगे और उसके पीछे हो लिए।
फिर वे बैतसैदा आए। तब लोग एक अंधे व्यक्ति को उसके पास ले आए और उससे विनती करने लगे कि वह उसे छुए। वह उस अंधे व्यक्ति का हाथ पकड़कर उसे गाँव के बाहर ले गया, उसकी आँखों पर थूका और उसके ऊपर हाथ रखकर उससे पूछा,"क्या तुझे कुछ दिखाई देता है?" उसने आँखें उठाकर कहा, "मैं लोगों को देखता हूँ, वे मुझे चलते हुए पेड़ों के समान दिखाई दे रहे हैं।" उसने दुबारा अपने हाथ उसकी आँखों पर रखे। जब उस अंधे व्यक्ति ने ध्यान से देखा, तो वह फिर से देखने लगा और उसे सब कुछ स्पष्ट दिखाई दे रहा था। तब यीशु ने यह कहकर उसे घर भेजा,"इस गाँव में प्रवेश मत करना।"
फिर यीशु सूर क्षेत्र से निकलकर सैदा होते हुए गलील की झील पर पहुँचा जो दिकापुलिस क्षेत्र के मार्ग के बीच में है। लोग एक बहरे और हकले व्यक्ति को उसके पास लाए तथा उससे विनती करने लगे कि वह उस पर अपना हाथ रखे। इस पर यीशु उसे भीड़ से अलग अकेले में ले गया और उसने अपनी उँगलियाँ उसके कानों में डालीं और थूककर उसकी जीभ को छुआ। फिर उसने स्वर्ग की ओर देखकर आह भरी और उससे कहा,"इफ्फत्तह," जिसका अर्थ है, खुल जा। तुरंत उसके कान खुल गए और उसकी जीभ का बंधन भी खुल गया; और वह स्पष्ट बोलने लगा।
तब यीशु ने लोगों को मना किया कि वे किसी को न बताएँ परंतु जितना वह उन्हें मना करता था, वे उतना ही अधिक प्रचार करते थे। लोग अत्यंत आश्चर्यचकित होकर कहने लगे, "सब कुछ उसने अच्छा किया है, वह बहरों को सुननेवाले और गूँगों को बोलनेवाले बना देता है।"
फिर वे यरीहो में आए। जब यीशु अपने शिष्यों और एक बड़ी भीड़ के साथ यरीहो से निकलकर जा रहा था तो एक अंधा भिखारी, तिमाई का पुत्र बरतिमाई मार्ग के किनारे बैठा हुआ था। वह यह सुनकर कि यीशु नासरी है, चिल्लाकर कहने लगा, "हे दाऊद के पुत्र यीशु, मुझ पर दया कर!" बहुत से लोग उसे डाँटने लगे कि वह चुप रहे; परंतु वह और भी अधिक चिल्लाने लगा, "हे दाऊद के पुत्र, मुझ पर दया कर!" तब यीशु ने रुककर कहा,"उसे बुलाओ!" और उन्होंने उस अंधे व्यक्ति को बुलाकर उससे कहा, "साहस रख! उठ, वह तुझे बुला रहा है!"
तब वह अपना चोगा फेंककर उठ खड़ा हुआ और यीशु के पास आया। इस पर यीशु ने उससे कहा,"तू क्या चाहता है कि मैं तेरे लिए करूँ?" तब उस अंधे व्यक्ति ने उससे कहा, "हे मेरे गुरु, यह कि मैं देखने लगूँ।" यीशु ने उससे कहा,"जा, तेरे विश्वास ने तुझे बचा लिया है!" और वह तुरंत देखने लगा और मार्ग में उसके पीछे हो लिया।
फिर ऐसा हुआ कि जब यीशु यरीहो के निकट पहुँचा, तो एक अंधा व्यक्ति मार्ग के किनारे बैठा भीख माँग रहा था। पास से निकलती हुई भीड़ की आवाज़ सुनकर वह पूछने लगा, "यह क्या हो रहा है?" लोगों ने उसे बताया, "यीशु नासरी जा रहा है।" तब उसने पुकारकर कहा, "हे यीशु, दाऊद के पुत्र, मुझ पर दया कर।" जो उसके आगे जा रहे थे, वे उसे डाँटने लगे कि वह चुप रहे; परंतु वह और भी अधिक चिल्लाने लगा, "हे दाऊद के पुत्र, मुझ पर दया कर।" तब यीशु ने रुककर उसे अपने पास लाने की आज्ञा दी। जब वह पास आया तो उसने उससे पूछा, "तू क्या चाहता है कि मैं तेरे लिए करूँ?" तब उसने कहा, "हे प्रभु, यह कि मैं फिर से देखने लगूँ।" यीशु ने उससे कहा,"देखने लग; तेरे विश्वास ने तुझे अच्छा किया है।" वह तुरंत देखने लगा, और परमेश्वर की महिमा करता हुआ उसके पीछे हो लिया। सब लोगों ने यह देखकर परमेश्वर की स्तुति की।
फिर जाते हुए यीशु ने एक मनुष्य को देखा, जो जन्म से अंधा था। उसके शिष्यों ने उससे पूछा, "रब्बी, किसने पाप किया कि यह अंधा जन्मा, इसने या इसके माता-पिता ने?" यीशु ने उत्तर दिया,"न तो इसने पाप किया और न ही इसके माता-पिता ने, परंतु यह इसलिए हुआ कि इसमें परमेश्वर के कार्य प्रकट हों। हमें उसके कार्यों को, जिसने मुझे भेजा है, दिन ही दिन में करना आवश्यक है, क्योंकि वह रात आने वाली है जब कोई कार्य नहीं कर सकता। जब तक मैं जगत में हूँ, इस जगत की ज्योति हूँ।" यह कहकर उसने भूमि पर थूका और उस थूक से मिट्टी सानी, और उस मिट्टी को उस अंधे व्यक्ति की आँखों पर लगाया और उससे कहा,"जा, शीलोह के कुंड में धो ले" (शीलोह का अर्थ है भेजा हुआ)। अतः उसने जाकर धोया और देखता हुआ लौट आया।
Curas de paralíticos e enfermos
Paralíticos caminharam, leprosos ficaram limpos e todo tipo de doença foi curada pelo toque e pela palavra de Jesus.
और देखो, एक कोढ़ी ने पास आकर उसे दंडवत् किया और कहा, "प्रभु, यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है।" यीशु ने हाथ बढ़ाकर उसे छुआ और कहा,"मैं चाहता हूँ; शुद्ध हो जा!" और वह तुरंत कोढ़ से शुद्ध हो गया। तब यीशु ने उससे कहा,"देख, तू किसी से न कह, बल्कि जा, अपने आपको याजक को दिखा और वह भेंट चढ़ा जिसकी आज्ञा मूसा ने दी है, ताकि उनके लिए साक्षी हो।"
और देखो, कुछ लोग एक लकवे के रोगी को खाट पर लिटाकर उसके पास लाए। तब यीशु ने उनके विश्वास को देखकर उस लकवे के रोगी से कहा,"पुत्र, साहस रख; तेरे पाप क्षमा हुए।" और देखो, कुछ शास्त्रियों ने अपने मन में कहा, "यह तो परमेश्वर की निंदा कर रहा है।" उनके विचारों को जानकर यीशु ने कहा,"तुम अपने मन में बुरा विचार क्यों कर रहे हो? सहज क्या है? यह कहना, ‘तेरे पाप क्षमा हुए’ या यह कहना, ‘उठ और चल फिर’? अब इससे तुम जान जाओ कि मनुष्य के पुत्र को पृथ्वी पर पाप क्षमा करने का अधिकार है।" तब उसने उस लकवे के रोगी से कहा,"उठ, अपनी खाट उठा और अपने घर चला जा।" और वह उठकर अपने घर चला गया।
और देखो, एक सूखे हाथवाला मनुष्य था। उन्होंने यीशु पर दोष लगाने के लिए उससे पूछा, "क्या सब्त के दिन स्वस्थ करना उचित है?" उसने उनसे कहा,"तुममें से कौन ऐसा मनुष्य होगा जिसके पास एक ही भेड़ हो, और वही सब्त के दिन गड्ढे में गिर जाए, और उसे पकड़कर न निकाले? फिर मनुष्य तो भेड़ से कितना अधिक मूल्यवान है। इसलिए सब्त के दिन भलाई करना उचित है।" तब यीशु ने उस मनुष्य से कहा,"अपना हाथ बढ़ा।" और उसने बढ़ाया और वह हाथ दूसरे हाथ के समान फिर से ठीक हो गया।
वहाँ शमौन की सास ज्वर में पड़ी हुई थी, और उन्होंने तुरंत उसके विषय में उसे बताया। तब उसने पास जाकर उसको हाथ पकड़कर उठाया; और उसका ज्वर उतर गया तथा वह उनकी सेवा करने लगी।
एक कोढ़ी यीशु के पास आया और घुटने टेककर उससे विनती करने लगा, "यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है।" यीशु ने उस पर तरस खाकर अपना हाथ बढ़ाया, उसे छुआ और उससे कहा,"मैं चाहता हूँ; शुद्ध हो जा!" और उसका कोढ़ तुरंत दूर हो गया और वह शुद्ध हो गया।
तभी लोग एक लकवे के रोगी को चार लोगों से उठवाकर उसके पास ले आए। परंतु जब वे भीड़ के कारण उसे यीशु के पास नहीं पहुँचा सके तो उन्होंने उस छत को, जिसके नीचे यीशु था, खोल दिया और खुली जगह बनाकर उस बिछौने को, जिस पर वह लकवे का रोगी पड़ा था, नीचे उतार दिया। तब यीशु ने उनके विश्वास को देखकर उस लकवे के रोगी से कहा,"पुत्र, तेरे पाप क्षमा हुए।" परंतु वहाँ कुछ शास्त्री बैठे हुए थे और वे अपने-अपने मन में विचार करने लगे, "यह ऐसा क्यों बोल रहा है? यह तो परमेश्वर की निंदा कर रहा है! परमेश्वर को छोड़ और कौन पाप क्षमा कर सकता है?"
तब यीशु ने तुरंत अपने आत्मा में जानकर कि वे अपने मन में इस प्रकार विचार कर रहे हैं, उनसे कहा,"तुम अपने-अपने मन में क्यों यह विचार कर रहे हो? सहज क्या है? लकवे के रोगी से यह कहना, ‘तेरे पाप क्षमा हुए’ या यह कहना, ‘उठ, अपना बिछौना उठा और चल फिर’? अब इससे तुम जान जाओ कि मनुष्य के पुत्र को पृथ्वी पर पाप क्षमा करने का अधिकार है," उसने उस लकवे के रोगी से कहा, "मैं तुझसे कहता हूँ, उठ, अपना बिछौना उठा और अपने घर चला जा!" वह उठा और तुरंत बिछौना उठाकर सब के सामने से बाहर निकल गया। इससे वे सब चकित हुए और परमेश्वर की महिमा करते हुए कहने लगे, "हमने ऐसा कभी नहीं देखा।"
यीशु फिर आराधनालय में गया। वहाँ एक मनुष्य था जिसका हाथ सूख गया था। फरीसी उसकी ताक में थे कि देखें, वह सब्त के दिन उसको स्वस्थ करेगा या नहीं, जिससे वे उस पर दोष लगा सकें। उसने उस सूखे हाथवाले मनुष्य से कहा,"उठ, बीच में खड़ा हो जा!" फिर उसने उनसे कहा,"क्या सब्त के दिन भला करना उचित है या बुरा करना, प्राण बचाना या मारना?" परंतु वे चुप रहे। उसने उन सब को क्रोध से देखा और उनके मन की कठोरता पर दुःखी होकर उस मनुष्य से कहा,"अपना हाथ बढ़ा!" उसने बढ़ाया और उसका हाथ फिर से ठीक हो गया।
फिर ऐसा हुआ कि जब वह किसी नगर में था, तो देखो, वहाँ कोढ़ से भरा एक मनुष्य था। उसने यीशु को देखा और अपने मुँह के बल गिरकर उससे विनती की, "हे प्रभु, यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है।" यीशु ने हाथ बढ़ाकर उसे छुआ और कहा,"मैं चाहता हूँ, शुद्ध हो जा!" और तुरंत उसका कोढ़ दूर हो गया।
और देखो, कुछ लोग एक मनुष्य को जो लकवे का रोगी था, खाट पर लाए और उसे भीतर ले जाकर यीशु के सामने रखना चाहते थे। जब भीड़ के कारण उसे भीतर ले जाने का कोई उपाय न सूझा, तो उन्होंने छत पर चढ़कर खपरैल हटाया और उसे खाट समेत बीच में यीशु के सामने उतार दिया। उनका विश्वास देखकर उसने कहा,"हे मनुष्य, तेरे पाप क्षमा हुए।" परंतु शास्त्री और फरीसी यह विचार करने लगे, "यह कौन है जो परमेश्वर की निंदा करता है? परमेश्वर को छोड़ और कौन पापों को क्षमा कर सकता है?" उनके विचारों को जानकर यीशु ने उनसे कहा,"तुम अपने-अपने मन में यह विचार क्यों कर रहे हो? सहज क्या है, यह कहना, ‘तेरे पाप क्षमा हुए,’ या यह कहना, ‘उठ और चल फिर’? अब इससे तुम जान जाओ कि मनुष्य के पुत्र को पृथ्वी पर पाप क्षमा करने का अधिकार है," फिर उसने लकवे के रोगी से कहा,"मैं तुझसे कहता हूँ, उठ, अपनी खाट उठा और अपने घर चला जा।" और वह तुरंत उनके सामने उठा और जिस पर वह लेटा हुआ था उसे उठाकर, परमेश्वर की महिमा करते हुए अपने घर चला गया।
ऐसा हुआ कि किसी और सब्त के दिन यीशु आराधनालय में जाकर उपदेश देने लगा, और वहाँ एक मनुष्य था जिसका दाहिना हाथ सूखा था। शास्त्री और फरीसी उसकी ताक में थे कि देखें, वह सब्त के दिन उसको स्वस्थ करता है या नहीं, जिससे उन्हें उस पर दोष लगाने का अवसर मिल जाए। परंतु वह उनके विचारों को जानता था; तब उसने उस सूखे हाथवाले मनुष्य से कहा,"उठ, और बीच में खड़ा हो," और वह उठकर खड़ा हो गया। फिर यीशु ने उनसे कहा,"मैं तुमसे पूछता हूँ, क्या सब्त के दिन भला करना उचित है या बुरा करना, प्राण बचाना या नाश करना?" और उसने चारों ओर उन सब को देखकर उस मनुष्य से कहा,"अपना हाथ बढ़ा।" उसने ऐसा ही किया और उसका हाथ फिर से ठीक हो गया।
जब यीशु ये सारी बातें लोगों को सुना चुका, तो कफरनहूम में आया। अब किसी शतपति का एक दास जो उसका प्रिय था, बीमारी से मरने पर था। जब उसने यीशु के विषय में सुना तो यहूदियों के धर्मवृद्धों को उसके पास यह निवेदन करने के लिए भेजा कि वह आकर उसके दास को बचा ले। वे यीशु के पास आए और उससे बड़ी विनती करके कहने लगे, "जिसके लिए तू यह करेगा, वह इसके योग्य है, क्योंकि वह हमारे लोगों से प्रेम रखता है, और उसी ने हमारे लिए आराधनालय बनवाया है।" यीशु उनके साथ चल पड़ा। परंतु जब वह उसके घर से दूर न था, तो शतपति ने अपने मित्रों को उससे यह कहने के लिए भेजा, "हे प्रभु, कष्ट न कर, क्योंकि मैं इस योग्य नहीं कि तू मेरी छत के नीचे आए। इस कारण मैंने अपने आपको तेरे पास आने के योग्य भी न समझा; परंतु तू वचन ही कह दे, और मेरा सेवक स्वस्थ हो जाएगा। क्योंकि मैं भी अधिकार के अधीन एक मनुष्य हूँ, मेरे अधीन सैनिक हैं और जब मैं एक से कहता हूँ, ‘जा,’ तो वह जाता है, और दूसरे से ‘आ,’ तो वह आता है, और अपने दास से, ‘यह कर,’ तो वह करता है।" यह सुनकर यीशु को उस पर आश्चर्य हुआ, और उसने मुड़कर अपने पीछे आ रही भीड़ से कहा,"मैं तुमसे कहता हूँ, मैंने इस्राएल में भी इतना बड़ा विश्वास नहीं पाया।" और जब वे लोग जो भेजे गए थे, वापस घर लौटे तो उस दास को स्वस्थ पाया।
और देखो, एक स्त्री अठारह वर्ष से दुर्बल करनेवाली आत्मा से ग्रस्त थी और वह कुबड़ी हो गई थी तथा पूरी तरह से सीधी खड़ी नहीं हो सकती थी। जब यीशु ने उसे देखा तो बुलाकर उससे कहा,"हे नारी, तू अपनी दुर्बलता से मुक्त हो गई है।" और उसने अपने हाथ उस पर रखे; तब वह तुरंत सीधी हो गई, और परमेश्वर की महिमा करने लगी।
फिर ऐसा हुआ कि जब यीशु सब्त के दिन फरीसियों के अधिकारियों में से एक के घर में रोटी खाने गया तो लोग उसे ध्यान से देख रहे थे।
और देखो, उसके सामने जलोदर रोग से पीड़ित एक मनुष्य था। इस पर यीशु ने व्यवस्थापकों और फरीसियों से कहा,"क्या सब्त के दिन स्वस्थ करना उचित है या नहीं?" परंतु वे चुप रहे। तब उसने उसे छूकर स्वस्थ किया और भेज दिया।
फिर ऐसा हुआ कि यीशु सामरिया और गलील के बीच में से होकर यरूशलेम को जा रहा था। जब वह किसी गाँव में प्रवेश कर रहा था, तो उसे दस कोढ़ी पुरुष मिले जो दूर खड़े थे, और उन्होंने ऊँची आवाज़ से पुकारा, "हे यीशु, हे स्वामी, हम पर दया कर।" यह देखकर यीशु ने उनसे कहा,"जाकर अपने आपको याजकों को दिखाओ।" और ऐसा हुआ कि जाते-जाते वे शुद्ध हो गए। परंतु उनमें से एक ने जब यह देखा कि वह स्वस्थ हो गया है, तो ऊँची आवाज़ से परमेश्वर की महिमा करता हुआ लौट आया, और यीशु के चरणों पर मुँह के बल गिरकर उसका धन्यवाद करने लगा; और वह एक सामरी था। इस पर यीशु ने कहा,"क्या दसों शुद्ध नहीं हुए? तो फिर वे नौ कहाँ हैं? क्या इस परदेशी को छोड़ कोई और नहीं रहा जो लौटकर परमेश्वर को महिमा देता?" और उसने उससे कहा,"उठ और जा; तेरे विश्वास ने तुझे अच्छा किया है।"
इन बातों के बाद यहूदियों का एक पर्व आया, और यीशु यरूशलेम को गया। यरूशलेम में भेड़-फाटक के पास एक कुंड है जो इब्रानी भाषा में बैतहसदा कहलाता है; उसके पाँच ओसारे हैं। इनमें बहुत से बीमार, अंधे, लंगड़े और सूखे अंगवाले [पानी हिलने की प्रतीक्षा में] पड़े रहते थे। [क्योंकि स्वर्गदूत निश्चित समय पर कुंड में उतरकर पानी को हिलाता था। पानी के हिलने के बाद जो भी उसमें पहले उतरता था, चाहे वह किसी भी बीमारी से पीड़ित क्यों न हो, स्वस्थ हो जाता था।] वहाँ एक मनुष्य था, जो अड़तीस वर्ष से अपनी बीमारी में पड़ा था। यीशु ने उसे पड़ा हुआ देखकर और यह जानकर कि वह बहुत समय से इस दशा में है, उससे पूछा,"क्या तू ठीक होना चाहता है?" उस बीमार ने उसे उत्तर दिया, "महोदय, मेरे पास कोई मनुष्य नहीं कि जब पानी हिलाया जाए तो मुझे कुंड में उतार दे। जब तक मैं पहुँचता हूँ कोई दूसरा मुझसे पहले उतर जाता है।" यीशु ने उससे कहा,"उठ, अपना बिछौना उठा, और चल फिर।" वह मनुष्य तुरंत ठीक हो गया, और अपना बिछौना उठाकर चलने-फिरने लगा।
वह दिन सब्त का दिन था।
तब वह फिर गलील के काना में आया, जहाँ उसने पानी को दाखरस बनाया था। वहाँ एक राजाधिकारी था जिसका पुत्र कफरनहूम में बीमार था। जब उसने यह सुना कि यीशु यहूदिया से गलील में आया है, तो वह उसके पास गया और उससे विनती करने लगा कि चलकर मेरे पुत्र को स्वस्थ कर दे, क्योंकि वह मरने पर था। तब यीशु ने उससे कहा,"जब तक तुम चिह्न और अद्भुत कार्य न देखोगे, तुम कभी विश्वास नहीं करोगे।" राजाधिकारी ने उससे कहा, "हे प्रभु, इससे पहले कि मेरा बच्चा मर जाए, तू चल।" यीशु ने उससे कहा,"जा, तेरा पुत्र जीवित है।" उस मनुष्य ने यीशु के वचन पर विश्वास किया और चल दिया। जब वह जा ही रहा था, तो उसके दास उससे मिले और कहने लगे कि तेरा लड़का जीवित है। तब उसने उनसे पूछा कि वह किस घड़ी ठीक होने लगा। इस पर उन्होंने उससे कहा, "कल दिन के एक बजे उसका ज्वर उतर गया था।" तब पिता जान गया कि यह वही घड़ी थी, जब यीशु ने उससे कहा था,"तेरा पुत्र जीवित है।" और उसने तथा उसके पूरे घराने ने विश्वास किया। यह दूसरा चिह्न था जो यीशु ने यहूदिया से गलील में आकर दिखाया।
A mulher com fluxo de sangue
Uma mulher que sofria há doze anos tocou a orla do manto de Jesus e foi curada instantaneamente pela sua fé.
और देखो, एक स्त्री ने जो बारह वर्ष से रक्तस्राव से पीड़ित थी, पीछे से आकर यीशु के वस्त्र का किनारा छू लिया। क्योंकि वह अपने मन में कहती थी, "यदि मैं उसके वस्त्र को ही छू लूँगी तो स्वस्थ हो जाऊँगी।" तब यीशु ने मुड़कर उसे देखा और कहा,"बेटी, साहस रख, तेरे विश्वास ने तुझे स्वस्थ कर दिया है।" और वह स्त्री उसी घड़ी स्वस्थ हो गई।
एक स्त्री थी जो बारह वर्ष से रक्तस्राव से पीड़ित थी। उसने अनेक वैद्यों के हाथों बहुत दुःख उठाया और अपना सब कुछ खर्च करने पर भी उसे कुछ लाभ नहीं हुआ बल्कि उसकी दशा और भी अधिक बिगड़ गई। उसने यीशु के विषय में सुना और भीड़ में पीछे से आकर उसका वस्त्र छू लिया, क्योंकि उसका कहना था, "यदि मैं उसके वस्त्र ही को छू लूँगी तो मैं स्वस्थ हो जाऊँगी।" तब तुरंत उसका रक्तस्राव बंद हो गया और उसने अपनी देह में जान लिया कि वह इस बीमारी से अच्छी हो गई है।
एक स्त्री थी जो बारह वर्ष से रक्तस्राव से पीड़ित थी। वह अपनी सारी जीविका वैद्यों पर व्यय कर चुकी थी, फिर भी कोई उसे स्वस्थ नहीं कर सका था। उसने पीछे से आकर यीशु के वस्त्र का किनारा छू लिया, और तुरंत उसका रक्तस्राव रुक गया। तब यीशु ने कहा,"मुझे किसने छुआ?" जब सब इनकार कर रहे थे तो पतरस ने कहा, "हे स्वामी, लोग तुझे घेरे हुए हैं और चारों ओर से दबा रहे हैं।" परंतु यीशु ने कहा,"किसी ने मुझे छुआ है, क्योंकि मैंने जान लिया है कि मुझमें से सामर्थ्य निकला है।" जब स्त्री ने यह देखा कि मैं छिप नहीं सकती, तो वह काँपती हुई आई और उसके सामने गिरकर सब लोगों के सामने बताया कि उसने किस कारण से उसे छुआ और कैसे वह तुरंत स्वस्थ हो गई। तब उसने उससे कहा,"बेटी, तेरे विश्वास ने तुझे स्वस्थ कर दिया है; शांति से जा।"
Ressurreições
Jesus ressuscitou mortos — a filha de Jairo, o filho da viúva de Naim e Lázaro. Ele é Senhor sobre a morte.
जब वह इन बातों को उनसे कह ही रहा था कि देखो, एक अधिकारी आया और उसे दंडवत् करके कहने लगा, "मेरी बेटी अभी मरी है; परंतु तू आकर उस पर अपना हाथ रख दे, और वह जीवित हो जाएगी।" तब यीशु उठकर अपने शिष्यों के साथ उसके पीछे चल दिया।
जब यीशु अधिकारी के घर पहुँचा, तो बाँसुरी बजानेवालों और भीड़ को कोलाहल मचाते देखकर कहा,"चले जाओ, क्योंकि लड़की मरी नहीं परंतु सो रही है।" इस पर वे उसकी हँसी उड़ाने लगे। परंतु जब वह भीड़ निकाल दी गई, तो यीशु ने भीतर आकर उस लड़की का हाथ पकड़ा, और वह जीवित हो गई।
तब आराधनालय के अधिकारियों में से याईर नामक एक अधिकारी आया और यीशु को देखकर उसके चरणों पर गिर पड़ा, और उससे गिड़गिड़ाकर विनती करने लगा, "मेरी छोटी सी बेटी मरने पर है; तू आकर उस पर अपना हाथ रख दे कि वह ठीक हो जाए और जीवित रहे।" अतः वह उसके साथ चल दिया।
एक बड़ी भीड़ उसके पीछे-पीछे चल रही थी और लोग उस पर गिरे जा रहे थे।
जब वे आराधनालय के अधिकारी के घर पहुँचे तो उसने कोलाहल मचा हुआ और लोगों को बहुत रोते और बिलखते हुए देखा। तब यीशु ने भीतर जाकर उनसे कहा,"तुम क्यों रोते और हल्ला मचाते हो? बच्ची मरी नहीं बल्कि सो रही है।" वे उसकी हँसी उड़ाने लगे; परंतु उसने सब को बाहर निकाल दिया और बच्ची के पिता और उसकी माता तथा अपने साथियों को लेकर भीतर गया, जहाँ वह बच्ची थी। तब उसने उस बच्ची का हाथ पकड़कर कहा,"तलीथा कूमी" जिसका अर्थ है,हे लड़की, मैं तुझसे कहता हूँ, उठ! वह लड़की तुरंत उठ खड़ी हुई और चलने-फिरने लगी क्योंकि वह बारह वर्ष की थी। इस पर लोग अत्यंत चकित हो गए।
" अतः इस पीढ़ी के लोगों की तुलना मैं किससे करूँ, कि वे किसके समान हैं? वे उन बालकों के समान हैं जो बाज़ार में बैठे हुए एक दूसरे से पुकारकर कहते हैं, ‘हमने तुम्हारे लिए बाँसुरी बजाई परंतु तुम नहीं नाचे; हमने विलाप का गीत गाया परंतु तुम नहीं रोए।’
"इसी रीति से यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला न तो रोटी खाते और न ही दाखरस पीते हुए आया, और तुम कहते हो, ‘उसमें दुष्टात्मा है।’ मनुष्य का पुत्र खाता-पीता आया है, और तुम कहते हो, ‘देखो, पेटू और पियक्कड़ मनुष्य, कर वसूलनेवालों और पापियों का मित्र।’ परंतु बुद्धि अपनी सब संतानों के द्वारा सच्ची ठहरती है।"
फिर एक फरीसी यीशु से निवेदन करने लगा कि वह उसके साथ भोजन करे; अतः वह उस फरीसी के घर में जाकर भोजन करने बैठ गया। और देखो, उस नगर में एक स्त्री थी, जो पापिन थी, और वह यह जानकर कि यीशु फरीसी के घर में भोजन करने बैठा है, संगमरमर के पात्र में इत्र लाई
और देखो, याईर नामक एक मनुष्य आया, जो आराधनालय का अधिकारी था, और वह यीशु के चरणों पर गिरकर उससे अपने घर चलने के लिए विनती करने लगा, क्योंकि उसकी एकलौती बेटी जो लगभग बारह वर्ष की थी, मरने पर थी।
जब यीशु जा रहा था तो भीड़ उस पर टूटी पड़ रही थी।
अभी यीशु यह कह ही रहा था कि आराधनालय के अधिकारी के घर से किसी ने आकर कहा, "तेरी बेटी मर गई है, अब गुरु को और कष्ट न दे।" जब यीशु ने यह सुना तो याईर से कहा,"मत डर! केवल विश्वास रख, और वह बच जाएगी।" फिर जब वह उस घर में पहुँचा तो उसने पतरस, यूहन्ना, याकूब और उस लड़की के माता-पिता को छोड़, और किसी को अपने साथ भीतर आने न दिया। सब लोग रो रोकर उसके लिए अपनी छाती पीट रहे थे। परंतु उसने कहा,"रोओ मत, क्योंकि वह मरी नहीं बल्कि सो रही है।" वे उसकी हँसी उड़ाने लगे, क्योंकि वे जानते थे कि वह मर चुकी है। परंतु उसने उसका हाथ पकड़कर पुकारा,"हे लड़की, उठ।" और उसका प्राण लौट आया, और वह तुरंत उठ खड़ी हुई, तब यीशु ने आदेश दिया कि उसे कुछ खाने को दिया जाए। उसके माता-पिता चकित हो गए, परंतु यीशु ने उन्हें आज्ञा दी कि जो हुआ उसे किसी को न बताएँ।
मरियम और उसकी बहन मार्था के गाँव बैतनिय्याह का लाज़र नामक एक व्यक्ति बीमार था। यह वही मरियम थी जिसने प्रभु पर इत्र डालकर उसके पैरों को अपने बालों से पोंछा था, इसी का भाई लाज़र बीमार था। इसलिए इन बहनों ने उसके पास यह कहला भेजा, "प्रभु! देख, जिससे तू प्रीति रखता है, वह बीमार है।" यह सुनकर यीशु ने कहा,"यह बीमारी मृत्यु की नहीं, बल्कि परमेश्वर की महिमा के लिए है, ताकि इसके द्वारा परमेश्वर के पुत्र की महिमा हो।" यीशु, मार्था और उसकी बहन और लाज़र से प्रेम रखता था। फिर जब उसने सुना कि वह बीमार है, तो जिस स्थान पर वह था, वहाँ दो दिन और रहा। तब इसके बाद उसने अपने शिष्यों से कहा,"आओ, हम फिर यहूदिया को चलें।" शिष्यों ने उससे कहा, "रब्बी, अभी तो यहूदी तुझ पर पथराव करना चाह रहे थे, और क्या तू फिर वहीं जा रहा है?" यीशु ने उत्तर दिया,"क्या दिन के बारह घंटे नहीं होते? यदि कोई दिन में चलता है तो ठोकर नहीं खाता, क्योंकि वह इस जगत की ज्योति को देखता है। परंतु यदि कोई रात में चलता है तो ठोकर खाता है, क्योंकि उसमें ज्योति नहीं है।" उसने ये बातें कहीं और इसके बाद उनसे कहा,"हमारा मित्र लाज़र सो गया है, और मैं उसे जगाने के लिए जा रहा हूँ।" तब शिष्यों ने उससे कहा, "प्रभु, यदि वह सो गया है तो बच जाएगा।" यीशु ने उसकी मृत्यु के विषय में कहा था। परंतु उन्होंने समझा कि वह विश्राम की नींद के विषय में कह रहा है। तब यीशु ने उनसे स्पष्ट कहा,"लाज़र मर गया,
Domínio sobre a natureza
Jesus acalmou a tempestade, andou sobre as águas e multiplicou pães. A natureza obedece à voz do seu Criador.
जब वह नाव पर चढ़ा तो उसके शिष्य भी उसके साथ हो लिए; और देखो, झील में एक ऐसा बड़ा तूफ़ान उठा कि नाव लहरों से ढकने लगी; परंतु यीशु सो रहा था। तब उसके शिष्यों ने पास आकर उसे जगाया और कहा, "प्रभु! बचा, हम नाश हो रहे हैं।" उसने उनसे कहा,"हे अल्पविश्वासियो, तुम क्यों डरते हो?" तब उसने उठकर आँधी और झील को डाँटा और बड़ी शांति छा गई। इस पर वे आश्चर्य करके कहने लगे, "यह कैसा मनुष्य है कि आँधी और झील भी इसकी आज्ञा मानते हैं?"
संध्या होने पर शिष्य उसके पास आकर कहने लगे, "यह स्थान निर्जन है और समय भी बीत चुका है; भीड़ को विदा कर, ताकि वे गाँवों में जाकर अपने लिए भोजन खरीद लें।" परंतु यीशु ने उनसे कहा,"उन्हें जाने की आवश्यकता नहीं; तुम ही उन्हें खाने को दो।" उन्होंने उससे कहा, "हमारे पास यहाँ पाँच रोटियों और दो मछलियों को छोड़ और कुछ भी नहीं है।" उसने कहा,"उन्हें यहाँ मेरे पास ले आओ।" तब उसने लोगों को घास पर बैठाने की आज्ञा देकर पाँच रोटियों और दो मछलियों को लिया और स्वर्ग की ओर देखकर आशिष माँगी, और रोटियाँ तोड़कर शिष्यों को दीं और शिष्यों ने लोगों को। सब ने खाया और तृप्त हो गए। फिर शिष्यों ने बचे हुए टुकड़ों से भरी बारह टोकरियाँ उठाईं। खानेवालों में स्त्रियों और बच्चों को छोड़ लगभग पाँच हज़ार पुरुष थे।
रात के लगभग तीन बजे यीशु झील पर चलते हुए उनके पास आया।
तब यीशु ने अपने शिष्यों को पास बुलाकर कहा,"मुझे इस भीड़ पर तरस आता है, क्योंकि ये लोग तीन दिन से मेरे साथ हैं और उनके पास खाने के लिए कुछ भी नहीं; मैं उन्हें भूखा नहीं भेजना चाहता, कहीं ऐसा न हो कि वे मार्ग में ही मूर्च्छित हो जाएँ।" शिष्यों ने उससे कहा, "जंगल में इतनी बड़ी भीड़ को तृप्त करने के लिए हम इतनी रोटियाँ कहाँ से लाएँ?" यीशु ने उनसे पूछा,"तुम्हारे पास कितनी रोटियाँ हैं?" उन्होंने कहा, "सात, और कुछ छोटी मछलियाँ।" तब लोगों को भूमि पर बैठने की आज्ञा देकर उसने सात रोटियाँ और मछलियाँ लीं, धन्यवाद देकर उन्हें तोड़ा और शिष्यों को देता गया, तथा शिष्य लोगों को। सब ने खाया और तृप्त हो गए, फिर उन्होंने बचे हुए टुकड़ों से भरे सात टोकरे उठाए। खानेवालों में स्त्रियों और बच्चों को छोड़ चार हज़ार पुरुष थे।
जब वे कफरनहूम में पहुँचे तो मंदिर का शुल्क लेनेवालों ने पतरस के पास आकर पूछा, "क्या तुम्हारा गुरु मंदिर का शुल्क नहीं देता?" उसने कहा "हाँ, देता है।" जब वह घर आया तो यीशु ने पहले ही उससे पूछ लिया,"शमौन, तू क्या सोचता है? इस पृथ्वी के राजा चुंगी या कर किनसे लेते हैं? अपने पुत्रों से या परायों से?" उसने कहा, "परायों से।" यीशु ने उससे कहा,"तो फिर पुत्र कर-मुक्त हैं। परंतु इसलिए कि हम उनके लिए ठोकर का कारण न बनें, तू जाकर झील में काँटा डाल और जो मछली पहले आए उसे ले, और उसका मुँह खोलने पर तुझे एक सिक्का मिलेगा; उसे लेकर मेरी और अपनी ओर से उन्हें दे दे।"
भोर को जब वह नगर में लौट रहा था, तो उसे भूख लगी। मार्ग में अंजीर का एक पेड़ देखकर वह उसके पास गया, और उसमें पत्तियों को छोड़ उसे और कुछ न मिला, तब उसने उस पेड़ से कहा,"अब से तुझमें कभी फल न लगे।" और वह अंजीर का पेड़ तुरंत सूख गया। जब शिष्यों ने यह देखा तो आश्चर्य किया और कहने लगे, "यह अंजीर का पेड़ तुरंत कैसे सूख गया?" यीशु ने उन्हें उत्तर दिया,"मैं तुमसे सच कहता हूँ, यदि तुम विश्वास रखो और संदेह न करो, तो तुम न केवल वह करोगे जो अंजीर के पेड़ के साथ किया गया, परंतु यदि इस पहाड़ से भी कहोगे, ‘उखड़ जा और समुद्र में जा गिर,’ तो वह हो जाएगा। जो कुछ तुम प्रार्थना में विश्वास से माँगोगे, वह सब तुम्हें मिल जाएगा।"
तब एक बड़ी आँधी आई और लहरें नाव से टकराने लगीं, यहाँ तक कि अब नाव में पानी भरने लगा। परंतु वह नाव के पिछले भाग में तकिया लगाकर सो रहा था। उन्होंने उसे जगाया और उससे कहा, "हे गुरु, क्या तुझे चिंता नहीं कि हम नाश हो रहे हैं?" उसने उठकर आँधी को डाँटा और झील से कहा,"शांत हो जा! थम जा!" और आँधी थम गई और बड़ी शांति छा गई। तब उसने उनसे कहा,"तुम क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अभी भी विश्वास नहीं?" वे अत्यंत भयभीत हो गए और आपस में कहने लगे, "आखिर यह है कौन कि आँधी और झील भी इसकी आज्ञा मानते हैं?"
जब बहुत समय बीत गया तो उसके शिष्य उसके पास आकर कहने लगे, "यह स्थान निर्जन है और अब समय भी बहुत हो गया है। उन्हें विदा कर कि वे आस-पास की बस्तियों और गाँवों में जाकर अपने खाने के लिए कुछ खरीद लें।" इस पर उसने उनसे कहा,"तुम ही उन्हें खाने को दो।" उन्होंने उससे कहा, "क्या हम जाकर दो सौ दीनार की रोटियाँ खरीदें और उन्हें खाने को दें?" फिर उसने उनसे पूछा,"तुम्हारे पास कितनी रोटियाँ हैं? जाकर देखो!" उन्होंने पता लगाकर कहा, "पाँच, और दो मछलियाँ भी।"
तब उसने उन्हें आदेश दिया कि सब लोगों को अलग-अलग समूहों में हरी घास पर बैठाएँ। अतः वे सौ-सौ और पचास-पचास के समूहों में बैठ गए। उसने पाँच रोटियों और दो मछलियों को लिया और स्वर्ग की ओर देखकर आशिष माँगी। फिर उसने रोटियाँ तोड़ीं और अपने शिष्यों को देता गया कि वे लोगों को परोसें; और उसने दो मछलियाँ भी उन सब में बाँट दीं। सब ने खाया और तृप्त हो गए। फिर शिष्यों ने रोटियों के टुकड़ों और मछलियों से भरी बारह टोकरियाँ उठाईं। जिन्होंने रोटियाँ खाईं, वे पाँच हज़ार पुरुष थे।
यह देखकर कि उन्हें नाव खेने में कठिनाई हो रही है क्योंकि हवा उनके विपरीत थी, वह रात के लगभग तीन बजे झील पर चलकर उनके पास आया। वह उनसे आगे निकल जाना चाहता था। परंतु उन्होंने उसे झील पर चलते देखकर समझा कि कोई भूत है, और वे चिल्ला उठे; क्योंकि सब ने उसे देखा और घबरा गए थे। परंतु उसने तुरंत उनसे बातें कीं और कहा,"साहस रखो, मैं हूँ; डरो मत।" जब वह नाव पर उनके पास आया तो हवा थम गई। वे मन ही मन में अत्यधिक अचंभित हुए,
उन्हीं दिनों में जब फिर से एक बड़ी भीड़ एकत्र हो गई और उनके पास खाने के लिए कुछ न था, तब यीशु ने शिष्यों को पास बुलाकर उनसे कहा, "मुझे इस भीड़ पर तरस आता है क्योंकि ये लोग तीन दिन से मेरे साथ हैं और उनके पास खाने के लिए कुछ भी नहीं है। यदि मैं उन्हें भूखा घर भेज दूँ तो वे मार्ग में ही मूर्च्छित हो जाएँगे; इनमें से कुछ लोग तो बहुत दूर से आए हैं।" इस पर उसके शिष्यों ने उससे कहा, "यहाँ इस जंगल में इन्हें तृप्त करने के लिए इतनी रोटियाँ कोई कहाँ से ला पाएगा?" उसने उनसे पूछा,"तुम्हारे पास कितनी रोटियाँ हैं?" उन्होंने कहा, "सात।"
तब उसने भीड़ को भूमि पर बैठने की आज्ञा दी, और उन सात रोटियों को लेकर धन्यवाद देते हुए तोड़ा और अपने शिष्यों को देता गया कि वे उन्हें परोसें और उन्होंने भीड़ को परोस दिया। उनके पास कुछ छोटी मछलियाँ भी थीं; और उसने उन पर आशिष माँगकर उन्हें भी परोसने को कहा। वे खाकर तृप्त हो गए, और उन्होंने बचे हुए टुकड़ों से भरे सात टोकरे उठाए। वे लगभग चार हज़ार लोग थे। फिर उसने उनको विदा किया
अगले दिन जब वे बैतनिय्याह से बाहर आए तो यीशु को भूख लगी। वह पत्तियों से भरे अंजीर के पेड़ को दूर से देखकर उसके पास गया कि कहीं उस पर कुछ मिल जाए। जब वह उसके पास पहुँचा तो उसे पत्तियों को छोड़ और कुछ न मिला; क्योंकि यह अंजीर के फल का समय नहीं था। तब उसने पेड़ से कहा,"अब से कोई तेरा फल कभी न खाए।" और उसके शिष्य यह सुन रहे थे।
फिर भोर को वहाँ से जाते हुए उन्होंने उस अंजीर के पेड़ को जड़ से सूखा हुआ देखा। तब पतरस ने स्मरण करके उससे कहा, "हे रब्बी, देख! वह अंजीर का पेड़ जिसे तूने शाप दिया था, सूख गया है।" इस पर यीशु ने उनसे कहा,"परमेश्वर पर विश्वास रखो। मैं तुमसे सच कहता हूँ कि जो कोई इस पहाड़ से कहे, ‘उखड़ जा और समुद्र में जा गिर’ और अपने मन में संदेह न करे बल्कि विश्वास करे कि जो कह रहा है, वह हो जाएगा, तो उसके लिए वही होगा। इस कारण मैं तुमसे कहता हूँ कि जो कुछ तुम प्रार्थना करके माँगते हो, विश्वास करो कि वह तुम्हें मिल गया और तुम्हारे लिए वही हो जाएगा। जब कभी तुम प्रार्थना के लिए खड़े होते हो, तो यदि तुम्हारे मन में किसी के विरुद्ध कुछ है तो उसे क्षमा करो जिससे कि तुम्हारा पिता भी जो स्वर्ग में है तुम्हारे अपराध क्षमा करे।
फिर ऐसा हुआ कि जब यीशु गन्नेसरत की झील के किनारे खड़ा था और लोग परमेश्वर का वचन सुनने के लिए उस पर गिरे पड़ रहे थे, तो उसने झील के किनारे दो नावें लगी हुई देखीं; और मछुए उनमें से उतरकर जालों को धो रहे थे। फिर उसने उन नावों में से एक पर, जो शमौन की थी, चढ़कर उससे कहा कि किनारे से थोड़ा हटा ले। तब वह बैठकर नाव से लोगों को उपदेश देने लगा। जब वह बोल चुका, तब उसने शमौन से कहा,"गहरे में ले चल और तुम मछलियाँ पकड़ने के लिए अपने जाल डालो।" इस पर शमौन ने कहा, "हे स्वामी, हमने पूरी रात परिश्रम किया पर कुछ हाथ नहीं लगा, फिर भी तेरे कहने पर मैं जाल डालूँगा।" और जब उन्होंने ऐसा किया तो बड़ी संख्या में मछलियाँ घेर लाए, और उनके जाल फटने लगे। उन्होंने अपने साथियों को जो दूसरी नाव में थे, संकेत किया कि वे आकर उनकी सहायता करें; और उन्होंने आकर दोनों नावें इतनी भर लीं कि वे डूबने लगीं। जब शमौन पतरस ने यह देखा तो यीशु के चरणों पर गिर पड़ा और कहने लगा, "प्रभु, मुझसे दूर रह, क्योंकि मैं पापी मनुष्य हूँ।" क्योंकि इतनी मछलियाँ पकड़ने पर उसे और उसके सब साथियों को अचंभा हुआ था; और ज़ब्दी के पुत्र याकूब और यूहन्ना की भी, जो शमौन के साझेदार थे, यही दशा हुई। तब यीशु ने शमौन से कहा,"मत डर! अब से तू मनुष्यों को पकड़ा करेगा।" तब वे नावों को किनारे पर लाए और सब कुछ छोड़कर उसके पीछे हो लिए।
फिर एक दिन ऐसा हुआ कि यीशु और उसके शिष्य नाव पर चढ़े, और उसने उनसे कहा,"आओ, हम झील के उस पार चलें।" अतः उन्होंने नाव खोल दी। जब वे नाव से जा रहे थे तो वह सो गया; और झील पर आँधी आई, तथा नाव में पानी भरने लगा और वे खतरे में थे। तब उन्होंने पास जाकर उसे जगाया और कहा, "स्वामी, स्वामी! हम नाश हो रहे हैं।" उसने उठकर आँधी और पानी की लहरों को डाँटा; और वे थम गईं, तथा शांति छा गई। उसने उनसे कहा,"तुम्हारा विश्वास कहाँ है?" पर शिष्य भयभीत और विस्मित होकर आपस में कहने लगे, "आखिर यह है कौन? यह आँधी और पानी को भी आज्ञा देता है, और वे इसकी आज्ञा मानते हैं!"
फिर एक दिन ऐसा हुआ कि यीशु और उसके शिष्य नाव पर चढ़े, और उसने उनसे कहा,"आओ, हम झील के उस पार चलें।" अतः उन्होंने नाव खोल दी। जब वे नाव से जा रहे थे तो वह सो गया; और झील पर आँधी आई, तथा नाव में पानी भरने लगा और वे खतरे में थे। तब उन्होंने पास जाकर उसे जगाया और कहा, "स्वामी, स्वामी! हम नाश हो रहे हैं।" उसने उठकर आँधी और पानी की लहरों को डाँटा; और वे थम गईं, तथा शांति छा गई। उसने उनसे कहा,"तुम्हारा विश्वास कहाँ है?" पर शिष्य भयभीत और विस्मित होकर आपस में कहने लगे, "आखिर यह है कौन? यह आँधी और पानी को भी आज्ञा देता है, और वे इसकी आज्ञा मानते हैं!"
फिर वे गिरासेनियों के क्षेत्र में पहुँचे, जो गलील के सामने है।
जब दिन ढलने लगा, तो बारहों ने पास आकर उससे कहा, "भीड़ को विदा कर, कि वे आस-पास के गाँवों और बस्तियों में जाकर ठहरें और उन्हें भोजन मिले, क्योंकि हम यहाँ निर्जन स्थान में हैं।" परंतु उसने उनसे कहा,"तुम ही उन्हें खाने को दो।" उन्होंने कहा, "यह तभी हो सकता है जब हम जाकर इन सब लोगों के लिए भोजन खरीद लें, नहीं तो हमारे पास पाँच रोटियों और दो मछलियों को छोड़ और कुछ नहीं है।" क्योंकि वहाँ लगभग पाँच हज़ार पुरुष थे। तब उसने अपने शिष्यों से कहा,"इन्हें लगभग पचास-पचास के समूहों में बैठा दो।" उन्होंने ऐसा ही किया और उन सब को बैठा दिया। तब उसने पाँच रोटियों और दो मछलियों को लिया और स्वर्ग की ओर देखकर आशिष माँगी, और उन्हें तोड़कर शिष्यों को देता गया कि लोगों को परोसें। अतः सब खाकर तृप्त हो गए, और उन्होंने बचे हुए टुकड़ों की बारह टोकरियाँ उठाईं।
तीसरे दिन गलील के काना में एक विवाह था, और यीशु की माता वहाँ थी। यीशु और उसके शिष्य भी उस विवाह में आमंत्रित थे। जब दाखरस कम पड़ गया तो यीशु की माता ने उससे कहा, "उनके पास दाखरस नहीं है।" यीशु ने उससे कहा,"हे नारी, इससे तेरा और मेरा क्या लेना-देना? अभी मेरा समय नहीं आया है।" उसकी माता ने सेवकों से कहा, "जो कुछ वह तुमसे कहे, वही करना।" उस समय वहाँ यहूदियों की शुद्धीकरण प्रथा के अनुसार पत्थर के छः घड़े रखे हुए थे, प्रत्येक में अस्सी से एक सौ बीस लीटर तक समाता था। यीशु ने सेवकों से कहा,"घड़ों को पानी से भर दो।" अतः उन्होंने उन्हें मुँह तक भर दिया। तब उसने उनसे कहा,"अब निकालकर भोज के प्रबंधक के पास ले जाओ।" और वे ले गए। जब भोज के प्रबंधक ने वह पानी चखा जो दाखरस बन गया था और नहीं जानता था कि यह कहाँ से आया है (परंतु जिन सेवकों ने पानी निकाला था, वे जानते थे), तो उसने दूल्हे को बुलाया और उससे कहा, "हर एक मनुष्य पहले अच्छा दाखरस देता है और जब लोग पीकर मतवाले हो जाते हैं तब उससे घटिया देता है। तूने तो अच्छा दाखरस अब तक बचा रखा है!" इस प्रकार यीशु ने गलील के काना में चिह्नों का आरंभ किया और अपनी महिमा प्रकट की, तथा उसके शिष्यों ने उस पर विश्वास किया।
परंतु वह उसे परखने के लिए यह कह रहा था, क्योंकि वह स्वयं जानता था कि वह क्या करने वाला है। फिलिप्पुस ने उसे उत्तर दिया, "दो सौ दीनार की रोटियाँ भी इनके लिए पर्याप्त नहीं होंगी कि हर एक को थोड़ी-थोड़ी मिल जाए।" उसके शिष्यों में से एक अर्थात् शमौन पतरस के भाई अंद्रियास ने उससे कहा, "यहाँ एक छोटा लड़का है जिसके पास जौ की पाँच रोटियाँ और दो मछलियाँ हैं, परंतु इतने लोगों के लिए ये क्या हैं?" यीशु ने कहा,"लोगों को बैठादो!" उस स्थान पर बहुत घास थी। तब वे जो संख्या में लगभग पाँच हज़ार पुरुष थे, बैठ गए। यीशु ने रोटियाँ लीं और धन्यवाद देकर बैठे हुए लोगों में बाँट दीं, उसी प्रकार उसने मछलियाँ भी लीं और जितनी वे चाहते थे, बाँट दीं। जब वे तृप्त हो गए तो उसने अपने शिष्यों से कहा,"बचे हुए टुकड़ों को बटोर लो ताकि कुछ भी नष्ट न हो।" अतः उन्होंने बटोर लिए, और जौ की पाँच रोटियों के टुकड़ों से, जो उन खानेवालों से बच गए थे, बारह टोकरियाँ भर लीं।
जब वे नाव खेते हुए लगभग तीन-चार मील दूर निकल गए, तो उन्होंने यीशु को झील पर चलते और नाव के पास आते हुए देखा, और वे डर गए। परंतु उसने उनसे कहा,"मैं हूँ, डरो मत!" तब उन्होंने उसे नाव पर चढ़ाना चाहा, इतने में नाव उसी स्थान पर पहुँच गई जहाँ वे जा रहे थे।
इन बातों के बाद यीशु ने तिबिरियास झील के तट पर अपने आपको शिष्यों पर फिर प्रकट किया; और उसने इस प्रकार प्रकट किया : शमौन पतरस और थोमा जो दिदुमुस कहलाता है और गलील के काना का नतनएल और ज़ब्दी के पुत्र और यीशु के शिष्यों में से दो अन्य जन, एक साथ थे। शमौन पतरस ने उनसे कहा, "मैं मछली पकड़ने जा रहा हूँ।" उन्होंने उससे कहा, "हम भी तेरे साथ आ रहे हैं।" वे निकलकर नाव पर चढ़ गए, परंतु उस रात उन्होंने कुछ नहीं पकड़ा।
भोर होने पर यीशु तट पर खड़ा था; फिर भी शिष्यों ने नहीं पहचाना कि वह यीशु है। तब यीशु ने उनसे कहा,"हे बच्चो! क्या तुम्हें कोई मछली नहीं मिली?" उन्होंने उसे उत्तर दिया, "नहीं।" फिर उसने उनसे कहा,"नाव के दाहिनी ओर जाल डालो तो पाओगे।" तब उन्होंने जाल डाला और अब मछलियों की बहुतायत के कारण वे उसे खींच नहीं पा रहे थे। तब उस शिष्य ने, जिससे यीशु प्रेम रखता था, पतरस से कहा, "वह प्रभु है!" अतः शमौन पतरस ने यह सुनकर कि वह प्रभु है, अंगरखा बाँधा, क्योंकि वह नग्न था, और झील में कूद पड़ा। परंतु अन्य शिष्य मछलियों से भरे जाल को खींचते हुए नाव से आए, क्योंकि वे भूमि से दूर नहीं बल्कि लगभग सौ मीटर पर थे।
जब वे भूमि पर आए तो उन्होंने कोयले की आग और उस पर मछली और रोटी रखी हुई देखी। यीशु ने उनसे कहा,"जो मछलियाँ तुमने अभी पकड़ी हैं, उनमें से कुछ लाओ।" अतः शमौन पतरस नाव पर चढ़कर एक सौ तिरपन बड़ी मछलियों से भरे जाल को भूमि पर खींच लाया; परंतु इतनी अधिक मछलियाँ होने पर भी जाल नहीं फटा।
Libertações
Jesus expulsou demônios com autoridade. Os espíritos impuros não resistiam à sua palavra e saíam imediatamente.
जब यीशु ने कफरनहूम में प्रवेश किया, तो एक शतपति उसके पास आया और उससे विनती करने लगा, "प्रभु, मेरा सेवक लकवे का मारा घर में पड़ा है और अत्यंत कष्ट में है।" यीशु ने उससे कहा,"मैं आकर उसे स्वस्थ करूँगा।" इस पर शतपति ने कहा, "प्रभु, मैं इस योग्य नहीं हूँ कि तू मेरी छत के नीचे आए; परंतु केवल वचन ही कह दे, और मेरा सेवक स्वस्थ हो जाएगा। क्योंकि मैं भी अधिकार के अधीन एक मनुष्य हूँ, मेरे अधीन सैनिक हैं और जब मैं एक से कहता हूँ, ‘जा’, तो वह जाता है, और दूसरे से ‘आ’, तो वह आता है; और अपने दास से, ‘यह कर’, तो वह करता है।" यह सुनकर यीशु को आश्चर्य हुआ और जो उसके पीछे चल रहे थे उनसे कहा,"मैं तुमसे सच कहता हूँ, इस्राएल मेंइतना बड़ा विश्वास मैंने किसी में नहीं पाया। मैं तुमसे कहता हूँ कि पूर्व और पश्चिम से बहुत लोग आएँगे और अब्राहम, इसहाक और याकूब के साथ स्वर्ग के राज्य में भोजन करने बैठेंगे; परंतु राज्य की संतान बाहर अंधकार में फेंक दी जाएगी, जहाँ रोना और दाँतों का पीसना होगा।" और यीशु ने शतपति से कहा,"जा, जैसा तूने विश्वास किया, वैसा ही तेरे लिए हो।" और उसका सेवक उसी घड़ी स्वस्थ हो गया।
जब यीशु उस पार गदरेनियों के प्रदेश में पहुँचा, तो दुष्टात्माग्रस्त दो मनुष्य कब्रों से निकलकर उसके सामने आए, जो इतने उग्र थे कि कोई उस मार्ग से जा नहीं सकता था। और देखो, उन्होंने चिल्लाकर कहा, "हे परमेश्वर के पुत्र, हमारा तुझसे क्या लेना-देना? क्या तू समय से पहले हमें यातना देने यहाँ आया है?" उनसे कुछ दूरी पर बहुत से सूअरों का एक झुंड चर रहा था। दुष्टात्माएँ उससे विनती करने लगीं, "यदि तू हमें निकाल रहा है, तो हमें उन सूअरों के झुंड में भेज दे।" तब यीशु ने उनसे कहा,"जाओ।" और वे निकलकर सूअरों में समा गईं; और देखो, सारा झुंड ढलान से नीचे झील की ओर तेज़ी से भागा और पानी में डूब मरा। इस पर चरवाहे भागे और नगर में जाकर यह सब और उन दुष्टात्माग्रस्त मनुष्यों की बात भी कह सुनाई। और देखो, सारा नगर यीशु से मिलने के लिए निकल आया और उसे देखकर विनती की, कि वह उनके क्षेत्र की सीमा से चला जाए।
जब वे बाहर निकल रहे थे तो देखो, लोग दुष्टात्माग्रस्त एक गूँगे मनुष्य को उसके पास लाए; और जब दुष्टात्मा निकाल दी गई, तो वह गूँगा मनुष्य बोलने लगा। इस पर लोगों को आश्चर्य हुआ और वे कहने लगे, "इस्राएल में ऐसा कभी नहीं देखा गया।"
तब यीशु के पास एक दुष्टात्माग्रस्त व्यक्ति को लाया गया जो अंधा और गूँगा था; उसने उसे अच्छा कर दिया और वह गूँगा व्यक्ति बोलने और देखने लगा।
फिर यीशु वहाँ से निकलकर सूर और सैदा के क्षेत्रों में चला गया। और देखो, उस क्षेत्र से एक कनानी स्त्री निकली और चिल्लाने लगी, "हे प्रभु, दाऊद के पुत्र, मुझ पर दया कर; मेरी बेटी बुरी तरह से दुष्टात्माग्रस्त है।" परंतु उसने उसे कोई उत्तर नहीं दिया। तब उसके शिष्य पास आकर उससे यह विनती करने लगे, "इसको भेज, क्योंकि यह हमारे पीछे-पीछे चिल्ला रही है।" इस पर उसने कहा,"मुझे इस्राएल के घराने की खोई हुई भेड़ों को छोड़ किसी और के पास नहीं भेजा गया।" परंतु वह आई और उसे दंडवत् करके कहने लगी, "प्रभु, मेरी सहायता कर।" इस पर उसने कहा,"बच्चों की रोटी लेकर कुत्तों के आगे फेंकना अच्छा नहीं।" परंतु उसने कहा, "हाँ प्रभु, परंतु कुत्ते भी तो अपने स्वामियों की मेज़ से गिरे हुए रोटी के टुकड़ों में से खाते हैं।" इस पर यीशु ने उससे कहा,"हे स्त्री! तेरा विश्वास बड़ा है; जैसा तू चाहती है वैसा ही तेरे लिए हो।" और उसी घड़ी उसकी बेटी अच्छी हो गई।
जब वे भीड़ के पास पहुँचे तो एक मनुष्य उसके पास आया और उसके सामने घुटने टेककर कहने लगा, "प्रभु, मेरे पुत्र पर दया कर, क्योंकि उसे मिर्गी आती है और बुरी तरह से पीड़ित है; और वह कभी आग में तो कभी पानी में गिर पड़ता है। मैं उसे तेरे शिष्यों के पास लाया था, परंतु वे उसे ठीक नहीं कर सके।" इस पर यीशु ने कहा,"हे अविश्वासी और भ्रष्ट पीढ़ी! कब तक मैं तुम्हारे साथ रहूँगा? कब तक तुम्हारी सहूँगा? उसे यहाँ मेरे पास लाओ।" तब यीशु ने दुष्टात्मा को डाँटा, और वह उसमें से निकल गई; तथा लड़का उसी घड़ी ठीक हो गया।
उसी समय उनके आराधनालय में एक मनुष्य था जिसमें अशुद्ध आत्मा थी और वह चिल्लाकर कहने लगा, "हे यीशु नासरी, हमारा तुझसे क्या लेना-देना? क्या तू हमें नाश करने आया है? मैं जानता हूँ कि तू कौन है : परमेश्वर का पवित्र जन।" परंतु यीशु ने उसे डाँटकर कहा,"चुप रह और उसमें से निकल जा!" तब वह अशुद्ध आत्मा उसे मरोड़कर ऊँची आवाज़ से चीखती हुई उसमें से निकल गई।
फिर वे झील के उस पार गिरासेनियों के क्षेत्र में आए। जब यीशु नाव से उतरा तो तुरंत एक मनुष्य जिसमें अशुद्ध आत्मा थी, कब्रों के बाहर उससे मिला। वह कब्रों में रहा करता था। कोई उसे ज़ंजीरों से भी नहीं बाँध सकता था, क्योंकि उसे बार-बार बेड़ियों और ज़ंजीरों से बाँधा जाता था परंतु वह ज़ंजीरों को टुकड़े-टुकड़े कर देता और बेड़ियों को भी तोड़ डालता था और कोई भी उसे वश में नहीं कर सकता था। वह निरंतर रात और दिन कब्रों और पहाड़ों में चिल्लाता रहता और स्वयं को पत्थरों से घायल करता रहता था। वह यीशु को दूर ही से देखकर दौड़ा और उसके चरणों पर गिर पड़ा और ऊँची आवाज़ से चिल्लाते हुए कहा, "हे परमप्रधान परमेश्वर के पुत्र यीशु, तुझसे मेरा क्या लेना-देना? मैं तुझे परमेश्वर की शपथ देता हूँ कि मुझे यातना न दे।" क्योंकि यीशु उससे कह रहा था,"हे अशुद्ध आत्मा, इस मनुष्य में से निकल जा!" फिर यीशु ने उससे पूछा,"तेरा नाम क्या है?" उसने उससे कहा, "मेरा नाम सेना है क्योंकि हम बहुत हैं।" तब वह उससे गिड़गिड़ाकर विनती करने लगा कि उन्हें उस क्षेत्र से बाहर न भेजे।
वहीं पहाड़ के पास सूअरों का एक बड़ा झुंड चर रहा था। उन्होंने उससे यह कहकर विनती की, "हमें इन सूअरों में भेज दे कि हम उनमें समा जाएँ।" अतः उसने उन्हें अनुमति दे दी। फिर अशुद्ध आत्माएँ उसमें से निकलकर सूअरों में समा गईं, और वह झुंड जो लगभग दो हज़ार का था, ढलान से नीचे झील की ओर तेज़ी से भागा और झील में जा डूबा।
उनके चरवाहे भाग गए और नगर तथा गाँवों में जाकर समाचार सुनाया; तब लोग देखने आए कि क्या हुआ।
परंतु तुम कहते हो ‘यदि कोई अपने पिता या अपनी माता से कहे कि जो कुछ तुम्हें मुझसे मिलना था, वह तो "कुरबान" अर्थात् परमेश्वर को अर्पित है, तो उसे अपने पिता या अपनी माता के लिए कुछ भी करना नहीं पड़ता।’ तुम अपनी परंपरा के द्वारा जिसे तुमने बनाए रखा है, परमेश्वर के वचन को व्यर्थ ठहरा देते हो और इसी प्रकार के और भी बहुत से कार्य करते हो।"
तब उसने भीड़ को फिर से पास बुलाया और उनसे कहा,"तुम सब मेरी बात सुनो और समझो! कोई भी वस्तु बाहर से मनुष्य के भीतर जाकर उसे अशुद्ध नहीं कर सकती, बल्कि जो मनुष्य के भीतर से निकलती हैं वे ही उसे अशुद्ध करती हैं।
फिर वहाँ से उठकर वह सूर के क्षेत्र में आया। जब उसने एक घर में प्रवेश किया तो वह चाहता था कि कोई यह न जाने, परंतु वह छिप न सका और तुरंत एक स्त्री जिसकी छोटी सी बेटी में अशुद्ध आत्मा थी, उसके विषय में सुनकर आई और उसके चरणों पर गिर पड़ी। यह सुरूफिनीकी मूल की यूनानी स्त्री थी। वह उससे विनती करने लगी कि वह उसकी बेटी में से दुष्टात्मा निकाल दे।
तब यीशु ने उससे कहा,"पहले बच्चों को तृप्त होने दे; क्योंकि बच्चों की रोटी लेकर कुत्तों के आगे फेंकना अच्छा नहीं।" परंतु उस स्त्री ने उसे उत्तर दिया, "हाँ प्रभु! परंतु कुत्ते भी तो मेज़ के नीचे, बच्चों की रोटी के टुकड़ों में से खाते हैं।" तब उसने उससे कहा,"इसी बात के कारण तू जा, दुष्टात्मा तेरी बेटी में से निकल गई है।" और अपने घर पहुँचकर उसने अपनी बच्ची को खाट पर पड़े हुए देखा और दुष्टात्मा निकल चुकी थी।
भीड़ में से एक व्यक्ति ने उसे उत्तर दिया, "हे गुरु, मैं अपने पुत्र को तेरे पास लाया था जिसमें गूँगी आत्मा समाई है। वह उसे जहाँ भी पकड़ती है, वहीं पटक देती है; और वह मुँह से झाग निकालता, अपने दाँत पीसता और सूखता जाता है। इसलिए मैंने तेरे शिष्यों से कहा कि उसे निकाल दें, परंतु वे निकाल न सके।" इस पर यीशु ने उनसे कहा,"हे अविश्वासी पीढ़ी! कब तक मैं तुम्हारे साथ रहूँगा? कब तक तुम्हारी सहूँगा? उसे मेरे पास लाओ।"
तब वे लड़के को उसके पास ले आए। उसको देखकर उस दुष्टात्मा ने तुरंत लड़के को मरोड़ा; और वह भूमि पर गिरकर मुँह से झाग निकालता हुआ इधर-उधर लोटने लगा। तब यीशु ने उसके पिता से पूछा,"ऐसा उसको कब से हो रहा है?" उसने कहा, "बचपन से; और उसने इसे नाश करने के लिए कभी आग में गिराया तो कभी पानी में। परंतु यदि तू कुछ कर सकता है तो हम पर तरस खाकर हमारी सहायता कर।" यीशु ने उससे कहा,"यदि तू कर सकता है? विश्वास करनेवाले के लिए सब कुछ संभव है।" बालक का पिता तुरंत गिड़गिड़ाकर कहने लगा, "मैं विश्वास करता हूँ; मेरे अविश्वास का उपाय कर!"
जब यीशु ने देखा कि भीड़ बढ़ती जा रही है तो उसने उस अशुद्ध आत्मा को यह कहकर डाँटा,"हे गूँगी और बहरी आत्मा, मैं तुझे आज्ञा देता हूँ कि इसमें से निकल जा और इसमें फिर कभी प्रवेश मत करना।" तब वह चीखती और बहुत मरोड़ती हुई उसमें से निकल गई; और वह लड़का मरा हुआ सा हो गया, जिस कारण बहुत लोग कहने लगे कि वह मर गया है। परंतु यीशु ने उसका हाथ पकड़कर उसे उठाया और वह उठ खड़ा हुआ।
वह आराधनालय से उठकर शमौन के घर गया। शमौन की सास तेज़ ज्वर से पीड़ित थी, और उन्होंने उसके लिए यीशु से विनती की। तब उसने उसके पास खड़े होकर ज्वर को डाँटा, और उसका ज्वर उतर गया तथा वह तुरंत उठकर उनकी सेवा करने लगी।
जब यीशु किनारे पर उतरा तो उसे उस नगर का एक मनुष्य मिला जो दुष्टात्माओं से ग्रसित था; वह बहुत समय से वस्त्र नहीं पहनता था और घर में नहीं बल्कि कब्रों में रहा करता था। वह यीशु को देखकर चिल्लाता हुआ उसके सामने गिर पड़ा और ऊँची आवाज़ में कहा, "हे परमप्रधान परमेश्वर के पुत्र यीशु, तुझसे मेरा क्या लेना-देना? मैं तुझसे विनती करता हूँ, मुझे यातना न दे।" क्योंकि यीशु ने अशुद्ध आत्मा को उस मनुष्य में से निकल जाने की आज्ञा दी थी, इसलिए कि वह बार-बार उसे पकड़ती थी। उस मनुष्य को ज़ंजीरों और बेड़ियों से बाँधकर पहरे में रखा जाता था, परंतु वह उन बंधनों को तोड़ डालता था और दुष्टात्मा उसे जंगलों में भगाए फिरती थी। फिर यीशु ने उससे पूछा,"तेरा नाम क्या है?" उसने कहा, "सेना," क्योंकि उसमें बहुत सी दुष्टात्माएँ समाई थीं। वे उससे विनती करने लगीं कि वह उन्हें अथाह कुंड में जाने की आज्ञा न दे। वहीं पहाड़ पर सूअरों का एक बड़ा झुंड चर रहा था; उन्होंने उससे विनती की कि वह उन्हें सूअरों में समा जाने की अनुमति दे; और उसने उन्हें अनुमति दे दी। फिर दुष्टात्माएँ उस मनुष्य में से निकलकर सूअरों में समा गईं, और वह झुंड ढलान से नीचे झील की ओर तेज़ी से भागा और जा डूबा।
जो कुछ हुआ वह देखकर चरवाहे भागे और नगर तथा गाँवों में जाकर समाचार सुनाया। तब जो हुआ था उसे देखने के लिए लोग निकलकर यीशु के पास आए, और उस मनुष्य को जिसमें से दुष्टात्माएँ निकली थीं, यीशु के चरणों में वस्त्र पहने तथा सचेत बैठे हुए पाया, और वे डर गए।
परंतु मैं तुमसे सच कहता हूँ कि यहाँ खड़े लोगों में से कुछ ऐसे हैं कि जब तक परमेश्वर के राज्य को न देख लें, तब तक मृत्यु का स्वाद कदापि न चखेंगे।"
फिर ऐसा हुआ कि इन बातों के लगभग आठ दिन बाद यीशु पतरस, यूहन्ना और याकूब को साथ लेकर प्रार्थना करने पहाड़ पर गया। जब वह प्रार्थना कर रहा था तो उसके मुख का रूप बदल गया और उसका वस्त्र श्वेत होकर चमकने लगा। और देखो, दो पुरुष उससे बातचीत कर रहे थे, वे मूसा और एलिय्याह थे। वे महिमा में प्रकट होकर यीशु की मृत्यु की बात कर रहे थे जो यरूशलेम में होने वाली थी।
पतरस और उसके साथी नींद में थे; परंतु जब वे पूरी तरह जागे तो उन्होंने यीशु की महिमा को और उन दो पुरुषों को जो उसके साथ खड़े थे, देखा। जब वे यीशु के पास से जाने लगे, तो पतरस ने यीशु से कहा, "हे स्वामी, हमारा यहाँ होना अच्छा है, इसलिए हम तीन मंडप बनाएँ, एक तेरे लिए, एक मूसा के लिए और एक एलिय्याह के लिए।" वह नहीं जानता था कि क्या कह रहा है।
और देखो, भीड़ में से एक मनुष्य ने पुकारकर कहा, "हे गुरु, मैं तुझसे विनती करता हूँ, मेरे पुत्र पर दृष्टि कर, क्योंकि वह मेरा एकलौता पुत्र है; और देख, एक आत्मा उसे जकड़ लेती है और वह अचानक चिल्लाने लगता है, और वह उसे ऐसे मरोड़ती है कि उसके मुँह से फेन निकलने लगता है और उसे तड़पाकर कठिनाई से छोड़ती है। मैंने तेरे शिष्यों से विनती की कि उसे निकाल दें, परंतु वे निकाल न सके।" इस पर यीशु ने कहा,"हे अविश्वासी और भ्रष्ट पीढ़ी! कब तक मैं तुम्हारे साथ रहूँगा और तुम्हारी सहूँगा? अपने पुत्र को यहाँ ले आ।" वह अभी आ ही रहा था कि दुष्टात्मा ने उसे पटककर मरोड़ा; परंतु यीशु ने उस अशुद्ध आत्मा को डाँटा, और लड़के को अच्छा करके उसके पिता को सौंप दिया। तब सब लोग परमेश्वर की महानता पर आश्चर्यचकित हुए।
जब सब लोग उन सब कार्यों पर जिन्हें वह कर रहा था आश्चर्य कर रहे थे, तो यीशु ने अपने शिष्यों से कहा,
फिर यीशु ने एक दुष्टात्मा को निकाला जो गूँगी थी; और ऐसा हुआ कि जब दुष्टात्मा निकली तो गूँगा मनुष्य बोलने लगा और लोगों को आश्चर्य हुआ;
और उनमें से किसी एक ने महायाजक के दास पर तलवार चलाकर उसका दाहिना कान उड़ा दिया। इस पर यीशु ने कहा,"बस, बहुत हुआ!" और उसका कान छूकर अच्छा कर दिया।
यूहन्ना के दूतों के जाने के बाद यीशु यूहन्ना के विषय में लोगों से कहने लगा,"तुम जंगल में क्या देखने निकले थे? क्या हवा से हिलते हुए सरकंडे को? फिर तुम क्या देखने निकले थे? क्या कोमल वस्त्र पहने हुए मनुष्य को? देखो, जो भड़कीले वस्त्र पहनते और विलासिता में रहते हैं, वे राजमहलों में रहते हैं। तो तुम क्या देखने निकले थे? क्या किसी भविष्यवक्ता को? हाँ, मैं तुमसे कहता हूँ, भविष्यवक्ता से भी बड़े व्यक्ति को। यह वही है जिसके विषय में लिखा है :
देख, मैं अपने दूत को तेरे आगे
भेज रहा हूँ,
जो तेरे आगे तेरा मार्ग तैयार करेगा।
"मैं तुमसे कहता हूँ, जो स्त्रियों से जन्मे हैं उनमें यूहन्ना से बड़ा कोई नहीं है; परंतु जो परमेश्वर के राज्य में सब से छोटा है, वह उससे भी बड़ा है।" (जो यह सुन रहे थे, उन सब लोगों ने और कर वसूलनेवालों ने भी यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेकर परमेश्वर को सच्चा ठहराया; परंतु फरीसियों और व्यवस्थापकों ने उससे बपतिस्मा न लेकर, अपने प्रति परमेश्वर की योजना को अस्वीकार कर दिया।)