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Marcos 1

आगमन षण

1 परम्‍वर मससमआर

2 यशभवियवक्‍ि:

, ैं अपनआग1:2 अक्षरशः तेरे मुँह के सामने रहूँ,

करा।1:2 मलाकी 3:1

3 एक आवगल ें रहै,

"रभकरो,

उसकपथ करो।"1:3 यशायाह 40:3

4 उसरकहन्‍आया, गल ें बपतिऔर ों षमिपश्‍बपतिरचकरता। 5 यहितथयरशलसब ििकलकर उसकआने, और अपनों करतउससयरदन नदें बपतिलगे।

6 हन्‍ों वस्‍पहनतऔर अपनकमर पर चमड़पटाँधततथििाँ और गलशहद करता। 7 वह यह कहकर रचकरता, "रहवह झसअधिमरै; ैं ककर उसकों लननहीं ूँ। 8 ैंें बपतििा, परवह ें पविआतबपतिा।"

बपति

9 उन िों ें ऐसि गलसरत आकर यरदन नदें हन्‍बपतििा। 10 ें ऊपर आतउसनआकलतऔर आतकबतर समअपनऊपर उतरता। 11 तब आकएक आवआई, "िै, ैं झसअति रसन्‍ूँ।"

पर

12 तब आतउसगल ें गया। 13 गल ें ितक उसकपररही। वह वन-पशरहऔर वरगदउसककरते।

गलें आर

14 हन्‍बनि, परम्‍वर 1:14 कुछ हस्तलेखों में "के राज्य" नहीं है। समरचकरतगलें आय15 और कहनलगा,"समय और परम्‍वर िकट गयै; पश्‍करऔर समपर ि्‍करो।"

रथम ि

16 जब वह गलिरहउसनशमऔर उसकिें लतोंि मछे। 17 उनसकहा,"आओ; ैं ें मनों मछबना।" 18 तब ों ड़कर उसकचल ि19 आगकर उसनज़ब, और उसकहन्‍ें ों रता। 20 उसनउनका; और अपनिज़बमज़दों ें ड़कर उसकचल ि

अशआतपर अधि

21 िकफरनहें आए और सबिआरधनलय ें कर उपदलगा। 22 उसकउपदआश्‍चरयचकिोंि वह उनें ्‍िों समनहीं बलि एक अधिसमउपदरहा।

23 उससमय उनकआरधनलय ें एक मनिसमें अशआतऔर वह ि्‍कर 24 कहनलगा, "सरी,1:24 अर्थात् नासरत का निवासी हमझसा-ा? हमें करनआयै? ैं नतूँ ि : परम्‍वर पविजन" 25 परउसाँटकर कहा,"रह और उसमें िकल ा!" 26 तब वह अशआतउसमरड़कर आवखतउसमें िकल गई27 सब अचिऔर आपस ें िर-विमरकरतकहनलगे, "यह ै? अधिएक नई िा! वह अशआतआजऔर उसकआजनतैं!"1:27 कुछ हस्तलेखों के अनुसार इस पद का अनुवाद इस प्रकार है : "यह क्या है? एक नई शिक्षा! वह अधिकार के साथ अशुद्ध आत्माओं को भी आज्ञा देता है और वे उसकी आज्ञा मानती हैं!" 28 िउसकचरगलआस-पसभों ें ों ओर गई

कफरनहें बहों वस

29 आरधनलय हर िकलतवह और हन्‍शमऔर िघर गया। 30 वहाँ शमवर ें पड़ी, और उनोंउसकिषय ें उसबता। 31 तब उसनकर उसकपकड़कर उठा; और उसकवर उतर गयतथवह उनककरनलगी।

32 समय जब गयसब ों और ्‍रसों उसकलग33 और नगर पर इकटगया। 34 उसनबहों ि्‍‍-ि्‍रकिों िे, वसिऔर बह्‍िा; और उसन्‍लननहीं िोंि उसनतीं।

गलें समरच

35 बड़ें वह उठकर हर िकल गयऔर िएकांपर कर वहाँ थनकरनलगा। 36 तब शमऔर उसकउसूँढ़नलगे। 37 जब वह िगयउनोंउससकहा, "सब ूँरहैं।" 38 उसनउनसकहा,"आओ, हम और कहीं आस-पबसिों ें चलें ि ैं वहाँ रचकरूँ ोंि ैं इसिआयूँ।" 39 िवह गलें कर उनकआरधनलयों ें रचकरतऔर ्‍िलतरहा।

40 एक आयऔर टनककर उससिनतकरनलगा, "यदि कर सकतै।" 41 उस पर तरस कर अपनबढ़ा, उसऔर उससकहा,"ैं हतूँ; ा!" 42 और उसकगयऔर वह गया। 43 तब उसनउसकड़वनकर िा, 44 और उससकहा,", िकहनबलि ा, अपनआपकजक िऔर अपनिषय ें वह ेंचढ़िसकआजै, ि उनकिो।" 45 परहर कर वह इस इतनअधिरचकरनऔर लगि नगर ें आम रवनहीं कर सकऔर हर िजन ों पर रहा; िों ओर उसकआतरहे।

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