A paixão de Cristo
A paixão de Cristo é o ato de amor supremo da história. Jesus sofreu voluntariamente a cruz, carregando os pecados da humanidade para nos dar vida eterna.
O caminho da cruz
Jesus sabia o que o aguardava. Mesmo em agonia, submeteu-se à vontade do Pai e caminhou resolutamente para o Calvário.
अपणी मृत्यु के बारें म्ह यीशु की भविष्यवाणी
उस बखत तै यीशु अपणे चेल्यां तै बताण लाग्या, "जरूरी सै के मै यरुशलेम म्ह जाऊँ अर यहूदी अगुवें, प्रधान याजकां, शास्त्रियाँ के हाथ्थां तै घणा दुख ठाऊँ; अर मार दिया जाऊँ; अर तीसरे दिन जी उठूँ।"
फेर उसनै उनतै कह्या, "मेरा मन घणा उदास सै, उरै ताहीं के मेरा जी लिकड़ण नै होरया सै। थम उरै ठहरो अर जागदे रहो।"
अर माणस कै रूप म्ह जाहिर होकै अपणे-आपनै दीन करया, अर परमेसवर का आज्ञाकारी रहया अर याड़ै तक के अपराधियाँ की तरियां मौत, हाँ क्रूस की मौत भी सह ली।
ज्यांतै जिब के परमेसवर के बच्चे सै, जो के माँस अर लहू तै बणे सै, अर उसका बेट्टा (यीशु मसीह) भी इन्सान बण्या, इस करकै वो एक इन्सान के रूप म्ह ए मर सकै था, अर सिर्फ मरण तै ए वो शैतान की शक्ति नै तोड़ सकै था, जिसकै धोरै मौत की शक्ति थी। अर इस तरियां यीशु नै उन सारे माणसां ताहीं मुक्त कर दिया जो हर बखत गुलाम्मां की तरियां जीवै थे, अर वे मरण तै डरै थे।
O sacrifício voluntário
Ninguém tirou a vida de Jesus — Ele a deu voluntariamente. Ele veio para servir e dar a sua vida em resgate por muitos.
पिता ज्यांतै मेरै तै प्यार करै सै, क्यूँके मै अपणी जान अपणी मर्जी तै दियुँ सूं, के उसनै दुबारै ले लूँ। कोए मेरी जान मेरै तै खोसदा कोनी, बल्के मै उसनै खुदे उसनै अपणी मर्जी तै दियुँ सूं। मन्नै उसकै देण का भी हक सै, अर उस ताहीं दुबारा लेण का भी हक सै, यो हुकम मेरै पिता नै मेरै ताहीं दिया सै।"
क्यूँके मै माणस का बेट्टा ज्यांतै कोनी आया के अपणी सेवा-पाणी करवाऊँ, पर ज्यांतै आया के खुद सेवा-पाणी करुँ, अर घणखरयां के छुटकारै कै खात्तर अपणी जान देऊँ।"
प्रधान याजक अर यहूदी अगुवां की सभा यीशु ताहीं मारण कै खात्तर उसकै बिरोध म्ह गवाही की टोह् म्ह थे, पर कोन्या मिली।
पर परमेसवर म्हारे पै अपणे प्यार की भलाई इस तरियां तै साबित करै सै, के जिब हम पापी ए थे, जिब्बे मसीह यीशु म्हारै खात्तर मरया।
अर थम इस्से कै खात्तर बुलाए भी गये सो, क्यूँके मसीह भी थारे खात्तर दुख ठाकै थारे ताहीं एक बढ़िया नमूना दे ग्या सै, ताके थम भी उसके नक्शे-कदम पै चाल्लों। पवित्र ग्रन्थ म्ह मसीह के बारें म्ह न्यू लिख्या सै, के "ना तो उसनै पाप करया अर ना उसकै मुँह तै छळ-कपट की कोए बात लिकड़ी।" वो गाळी सुणकै गाळी कोनी देवै था, अर दुख ठाकै किसे ताहीं भी धमकी कोनी देवै था, पर अपणे-आप ताहीं परमेसवर कै हाथ म्ह सौंप दिया, जो धार्मिकता तै न्याय करै सै। वो आप ए म्हारै पापां नै अपणी देह पै लिये होए क्रूस पै चढ़ गया, जिसतै हम पापां कै खात्तर मरकै धार्मिकता कै खात्तर जीवन बितावां, उस्से कै मार खाण तै थम चंगे होए।
वो तुच्छ जाण्या जान्दा अर माणसां का छोड्या होया था; वो दुःखी माणस था, रोग तै उसकी जाण-पिछाण थी; अर माणस उसतै मुँह फेर लेवैं थे। वो निकम्मा जाण्या गया, अर, हमनै उसका मोल न्ही जाण्या।
पक्का उसनै म्हारे रोगां ताहीं सह लिया अर म्हारे ए दुःखां ताहीं ठा लिया; फेर भी हमनै उस ताहीं परमेसवर का मारया-कूट्या अर बुरी हालत म्ह पड्या होया समझया। पर वो म्हारे ए अपराध्धां कै कारण घायल करया गया, वो म्हारे अधर्म के काम्मां कै कारण कुचल्या गया; म्हारी ए शान्ति कै खात्तर उसपै फटकार पड़ी ताके उसके कोड़े खाण तै हम चंगे हो जावां।