10 क्यूँके पवित्र ग्रन्थ कहवै सै, के "जै कोए इन्सान जिन्दगी का आनन्द ठाणा चाहवै सै, अर आच्छे दिन देखणा चाहवै सै, तो वो ध्यान राक्खे के बुरी बातें अर जो बात सच न्ही उन ताहीं ना बोल्लो। 11 जो बुरे काम सै, उन ताहीं करणा छोड़ दे, इसकी बजाए वो भले काम करै, अर एक-दुसरे के साथ शान्ति तै रहण का पूरा जतन करै।
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