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विलापगीत 4

िगति

1 ्‍ितरिां ा, सबतखर्‍ितरिां बदल ै?4:1 सोन्‍ना किस तरियां खोट्टा होग्या, सबतै ज्यादा खरा सोन्‍ना किस तरियां बदल ग्या सै? सोन्‍ने का अपमान

पविरस्‍पतथर हर एक सडिेंिगए ै।

2 िदन बरबर े,

बणघडां ितरिां िगए ै!

3 दड़ी अपणबचां थणां लगिै,

पर णसां गळ ों बरबर िदयै।

4 आळळकां िपक गई ै;

ल-बच्‍ाँैं ै, पर उन ीं ा।

5 िैं े, इब सडां िैं ै;

मखमल कपडां पळइब गळिाँ टदिै।

6 णसां अधरसदघण

ििपलभर उला।4:6 उत्प. 19:24-25

7 उसक4:7 कुलीन यरुशलेम के प्रधानां ििमल अर घणे;

उनकाँ घण, अर उनकबसरतलमणि िी।

8 पर इब उनकअनधकघणै, सडां िे;

उनकचमड़ा िाँ िा, अर कड़ी तरिां ै।

9 तलवां घणआच

िसकउपज िखदै।

10 दयजन्‍अपणां अपणळकां ीं पकै;

णसां िबखत उनकबणगे।

11 यहअपणजळजळहट िकरी,

उसनअपणघणभडा;

अर िइसआग लगिसत

उसकींतक भसै।

12 धरतजगत रहण आळ

इसककदिकर सका,

िअर मन यरशलटकां ितर बडें।

13 उसकनबिाँ ां अर उसकजकां अधरां रण ै;

ूँउसकधरिाँ करदआए ै।

14 इब सडां आनसरे-िैं ै,

अर ्‍लहाँ ़ै तक अश

उनककपडां सकदा।

15 उनन्‍रककहवैं ै, "अरअशणसों, हट ! हट ! ीं "

िे-िरण े,

रजां णसां कहा, "भविउरिकण ें"

16 यहअपणउन ीं ितर-बितर करया, उनपदयनजर करा;

जकां समा, अर रनिां िअनरह करयगया।

17 मदद खदे-खदुँधळपडै,

हम लगएक इसओडखदरहबचसकी।

18 इसपड़े हम अपणनगर ां सके;

आया; उम; ूँअना।

19 भगआळअकघणगति ्‍े;

पह़ां पडअर गल तर लगठगे।

20 यहअभििा,

अर िसकहमनरजां िहम उसकशरण िरहवैंे,

उनकखडपकडगया।

21 एदी, ऊज रहवै, हरिअर आननिरह;

पर कटीं हचा, अर मतवअपणआप करी।

22 िी, अधरसजखतम , तन्‍ा;

पर एदी, अधरसजतन्‍ा, ां िकर ा।

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