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विलापगीत 2

यरशलपरमसवर

1 यहिीं ितरिां अपणदळां ाँिै!

उसनइसएल ीं अकधरतपटक िा;

अर िअपणां ीं करया।

2 यहबसिाँ ीं कठरतखतम करयै;

उसनआकयहमजबगढ़ा ीं िििै;

उसनिां समीं अपविठहरै।

3 उसनआकइसएल ींीं जडिै;

उसनमन उनकमदद करण अपणींिै;

उसनांओडभसकर तरिां ीं जळिै।

4 उसनमन बणकधनचढ़ाा, अर बणकबढ़ाखडै;

अर ितनखण मन वण आळे, उन सब ीं उसनकरया;

ितमउसनआग तरिां अपणजळजळहट भडै।2:4 सिय्योन की बेट्टी के तम्बू पै उसनै आग की तरियां अपणी जळजळाहट भड़का दी सै। यरुशलेम

5 यहमन बणगा, उसनइसएल ीं िगळ िा;

उसकभवनां ीं उसनििा, अर उसकमजबगढ़ा ीं खतम कर िै;

अर यहा-टण, घणबढ़ाै।

6 उसनअपणमणडप मचतरिां णचक ििा,

अपणिप-सीं उसनकरयै;

यहिठहरअर िमदिीं िै,

अर अपणभडअर जक जतकरै।

7 यहअपणमन उती,

अर अपणपविरस्‍अपमिै;

उसकभवनां ां ीं उसनमनां वश कर िा;

यहभवन उननइसर-सरमच्‍ठहरिो।

8 यहि2:8 सिय्योन यरुशलेम नगर शहरपनी:

उसनअर अपणउस ीं करण ींा;

उसनिअर शहरपनीं िकरवा, ्‍एक िगए ै।

9 िनगर टक धरतधसगै, उनकें़ा ीं उसनकरया।

उसकअर िरजां रहण रण िियम-कयदै,

अर उसकनबयहदरशन े।

10 िरनिधरतपचै;

उननअपणिउड़ाअर ेंाँै;

यरशलुँिाँ अपणा-अपणिधरततक ै।

11 ांहदे-ांहदुँधळपडै;

आत़िाँ ै;

णसां िरण ळजै,

ूँबच्‍ें बलिंबच्‍ें नगर ां ै।

12 अपणी-अपणाँ कहवै,

अन्‍अर शहद िै?

नगर ां यल करणस तरिां

अपणअपणी-अपणाँ ै।

13 यरशली, कहूँ?

लनिसतकरुँ?

िकना, बरबर ठहरतन्‍ि िुँ?

ूँसमदर अपै;

तन्‍कर सकै?

14 नबिाँ दरशन करकअर कहै;

उननअधरिकरया, ांी;

पर उननीं अर वचन बत

तर ििरण

15 ि़ी बजै;

यरशलकहक़ी बजअर ििै,

नगरिीं परम दर

अर धरतरण कहकरैं े?2:15 मत्ती 27:39

16 मनां ुँपसरयै,

बजैं अर ाँै, कहवै, हम उस ीं िगळगां!

ििहम े, ै,

ीं िलगा, हम उस ीं ां!

17 यहकरयै,

वचन बखत कहनआयउसनकरयै;

उसनकठरतीं ़ा िै, उसनमनां ीं आननिकरया,

अर िाँ ींीं ्‍करयै।

18 रभओडतन-मन ैं!

िशहरपन,

अपणत-दिनदतरिां बहरह!

़ा-आरे, तले!

19 हर पहर शरआत खड़ी ि्‍कर!

रभअपणमन ां तरिां उण!

ल-बच्‍हर एक सडिरण रहै,

उनकतर अपणउसकओडा।

20 यहिांकर, अर तन्‍िसतिै?

जन्‍अपणफळ अपणळकां ें?

रभु, जक अर नबपविरस्‍करै?

21 सडां अर ़े ्‍धरतपड़े ै;

िाँ अर जवतलविरगै;

तन्‍करण िउन ीं रया;

तन्‍कठरतउनककरयै।

22 तन्‍डर, भय रणीं ठहरतरिां ांओडै;

अर यहििकडअर बचरहयै;

िीं मन्‍िअर ळ-पसकबढ़ाा, मन उनका, कर िै।

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