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प्रकाशितवाक्य 14:1-5

मेम्‍ना अर उसके 144,000 लोग

1 पर उसकै बाद मन्‍नै कुछ और भी देख्या, वो मेम्‍ना सिय्योन पहाड़ पै खड्या सै, अर उसकै गेल्या एक लाख चवाळीस हजार माणस सै, जिनकै माथ्थै पै उसका अर उसकै पिता का नाम लिख्या होड़ सै। 2 अर सुर्ग तै मन्‍नै एक इसा शब्द सुणाई दिया, जो पाणी की घणी धारा अर बड़े गरजण जिसा शब्द था, अर जो शब्द मन्‍नै सुण्या, वो इसा था, मान्‍नो वीणा बजाण आळे वीणा बजान्दे हों। 3 अर वे सिंहासन कै स्याम्ही अर च्यांरु प्राणियाँ अर बुजुर्गां कै स्याम्ही मान्‍नो, एक नया गीत गाण लागरे थे, अर उन एक लाख चवाळीस हजार माणसां ताहीं छोड़ जो धरती पै तै छुड़ाए गये थे, कोए वो गीत न्ही सीख सकै था। 4 ये वे सै, जो जनानियाँ कै गेल्या अशुद्ध न्ही होए, पर कुवांरे सै। ये वेए सै, के जित्त किते मेम्‍ना जावै सै, वे उसकै पाच्छै हो लेवैं सै। जिस तरियां लोग अपणी फसल म्ह तै पैहला फळ परमेसवर ताहीं चढ़ावै सै, उस्से तरियां वो भी परमेसवर अर मेम्‍ने खात्तर पैहले फळ के रूप म्ह चढ़ाए गए सै। 5 अर उनके मुँह तै झूठ न्ही लिकड़या था, वे बेकसूर सै।

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