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श्रेष्ठगीत 3

्‍आळ

1 बखत अपणपलअपणणपिरही;

उस ीं

रही, पर उस ीं ा,

2 "मन्‍कहा, इब खड़ी नगर ,

अर सडां अर ां मकणपिी।"

उस ीं रही, पर उस ीं ा।

3 पहरनगर े, मन्‍िे,

मन्‍उनता, "थमनणपिीं ै?"

4 मन्‍उनकआगबढ़े ़ी-ी,

णपिमन्‍िलगा।

मन्‍उस ीं पकडिा, अर उस ीं ि

ितक उस ीं अपणाँ घर अपणमण आळठड़ी आई

5 यरशलिों, ििाँ

अर िरणाँ कसम, कहूँ ूं,

ितक आप ै,

तब तक उस ीं उकसअर जग

सर

हन

6 खमतरिां,

गनधरस अर शब,

अर लग

गल िकडआवै?

7 ो, लकै!

उसकांओडइसएल रवां ै।

8 तलवांगण आळअर ििै।

हरणस हमलडर ाँतलवलटकरहवै।

9 अपणतर लबएक बड़ी लकबणवी।

10 उसनउसकखमाँे,

उसकिरह्‍ा, अर गदैंगणबणवै,

अर उसकितरलिीं

यरशलिाँ ओडबड़े

जडगयै।

11 ििरबिों िकडिांकरो,

ो, हर

िीं उसकाँ उसक

िअर उसकमन आननि, उसकिधरया।

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