33 अर माणसां नै सिखाण आळे बुद्धिमान जन घणखरयां नै समझावैंगे, तोभी वे भोत दिन ताहीं तलवार तै छिदकै अर आग म्ह जळकै, अर गुलाम होकै अर लुटकै, बड़े दुःख म्ह पड़े रहवैंगे। 34 जिब वे दुःख म्ह पड़ैंगे फेर थोड़ा घणा सम्भलैंगे, पर भोत-से माणस चिकणी-चुपड़ी बात कह-कहकै उनतै मिल जावैंगे; 35 अर बुद्धिमानां म्ह तै किते गिरैंगे, अर इस करकै गिरण पावैगें की जाँचे जावै, अर निर्मल अर उजळे करे जावैं। या हालत अन्त के बखत ताहीं बणी रहवैगी, क्यूँके इन सारी बात्तां का अन्त परमेसवर के ठहराए होए बखत म्ह होण आळा सै।"
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