20 "परमेसवर का नाम युगानुयुग धन्य सै;
क्यूँके बुद्धि अर पराक्रम उसी के सैं।
21 बखत अर मौसम नै वोए पलटै सै;
राजाओं का डूबणा अर उगणा भी वोए करै सै;
बुद्धिमानां नै बुद्धि अर समझ आळयां नै समझ भी वोए देवै सै;
22 वोए गूढ़ अर गुप्त बात्तां नै जाहिर करै सै2:22 गूढ़ अर गुप्त बात्तां नै जाहिर करै सै वे बात्तां जो माणस की बुद्धि तै जाणण कै खात्तर भोत जरूरी सै अर जिब ताहीं परमेसवर प्रगट ना करे फेर ताहीं वे गुप्त एवं मुश्किल तै जाणण आळी ही रहवैगी।;
वो जाणै सै के अंधियारे म्ह के सै,
अर उसकै गैल सदा रोशनी बणी रहवै सै।
23 हे मेरे बुजुर्गां के परमेसवर,
मै तेरा धन्यवाद अर स्तुति करुँ सूं,
क्यूँके तन्नै मेरे ताहीं बुद्धि अर शक्ति दी सै,
अर जिस भेद का खुलणा हम माणसां नै तेरै तै मांग्या था,
उसनै तन्नै मेरे पै जाहिर करया सै,
तन्नै म्हारे ताहीं राजा की बात बताई सै।"