37 हे राजा, तू तो महाराजाधिराज सै, क्यूँके सुर्ग के परमेसवर नै तेरे ताहीं राज्य, ताकत, शक्ति अर महिमा दी सै, 38 अर जित्त किते माणस पाए जावैं सैं, ओड़ै उसनै उन सारया ताहीं, अर मैदान के जीव-जन्तु, अर अकास कै पंछी भी तेरे बस म्ह कर दिए सैं; अर तेरे ताहीं उन सारया का अधिकारी ठहराया सै। यो सोन्ने का सिर तू ए सै।
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