10 जो दर्शन मन्नै पलंग पै पाया वो या सै: मन्नै देख्या, के धरती के बीचो बीच एक दरखत लाग्या सै; उसकी ऊँचाई घणी बड़ी सै। 11 वो दरखत बड़ा होकै मजबूत हो गया, अर उसकी ऊँचाई सुर्ग ताहीं पोहची, अर वो सारी धरती की छोर ताहीं दिखाई देवै था। 12 उसके पत्ते सुन्दर, अर उस म्ह घणे फळ थे, उरै ताहीं के उस म्ह सारया कै खात्तर भोजन था। उसकै नीच्चै मैदान के सारे पशुआं ताहीं छाया मिलै थी, अर उसकी डालियाँ म्ह अकास की सारी चिड़ियाँ बसेरा करै थी, अर सारे प्राणी उसतै भोजन पाया करदे।"
20 जिस दरखत ताहीं तन्नै देख्या, जो बड़ा अर मजबूत होग्या, अर जिसकी ऊँचाई सुर्ग ताहीं पोहची अर जो धरती के सिरे तक दिखाई देवै था; 21 जिसके पत्ते सुन्दर अर फळ घणे थे, अर जिस म्ह सारया कै खात्तर भोजन था; जिसकै नीच्चै मैदान के सारे पशु रहवै थे, अर जिसकी डालियाँ म्ह अकास की चिड़ियाँ बसेरा करै थी, 22 हे राजा, वो तू आप्पे सै। तू महान अर ताकतवर होग्या, तेरी महिमा बढ़ी अर सुर्ग ताहीं पोहचगी, अर तेरी प्रभुता धरती की छोर ताहीं फैली सै।