30 "के यो बड़ा बाबेल न्ही सै, जिस ताहीं मन्नै ए अपणे बल अर ताकत तै राज्य म्ह रहण ताहीं अर अपणे प्रताप की बड़ाई कै खात्तर बसाया सै?" 31 यो वचन राजा के मुँह तै लिकड़ण भी ना पाया था के आकाशवाणी होई, "हे राजा नबूकदनेस्सर तेरे बारै म्ह या हुकम लिकड़या सै के राज्य तेरे हाथ तै लिकड़ ग्या, 32 अर तू माणसां के बीच म्ह से लिकाड़या जावैगा, अर मैदान के पशुआं कै गैल रहवैगा; अर बळधां की तरियां घास चरैगा अर सात काल तेरै पै बीतैगें, जिब ताहीं के तू ना जाण लेवै के परमप्रधान परमेसवर, माणसां कै राज्य म्ह प्रभुता करै सै अर जिसनै चाहे वो उसनै दे देवै सै।" 33 उसी बखत या वचन नबूकदनेस्सर कै बारै म्ह पूरा होया। वो माणसां म्ह तै लिकाड़या गया, अर बळधां की तरियां घास चरण लाग्या, अर उसका शरीर अकास की ओस तै भीज्या करदा, उरै ताहीं के उसके बाल उकाब पक्षियां के परां तै अर उसके नाखून चिड़ियाँ के पंज्याँ की तरियां बढ़गे।
नबूकदनेस्सर के जरिये परमेसवर की बड़ाई
34 सात साल के बित्तण पै, मुझ नबूकदनेस्सर नै अपणी आँख सुर्ग की और ठाई, अर मेरी बुद्धि फेर ज्यों की त्यों होगी; फेर मन्नै परमप्रधान परमेसवर ताहीं धन्य कह्या, अर जो सदा जिन्दा सै उसकी स्तुति अर महिमा या कहकै करण लाग्या:
उसकी प्रभुता सदा की सै
अर उसका राज्य पीढ़ी तै पीढ़ी फेर बण्या रहण आळा सै।
35 धरती के सारे रहण आळे परमेसवर के स्याम्ही निकम्मा गिणे जावैं सैं,
अर वो सुर्ग की सेना अर धरती के रहण आळयां कै बीच
अपणी इच्छा कै मुताबिक काम करै सै;
अर कोए उसनै रोक कै उसतै न्ही कह सकदा, "तन्नै यो के करया सै?"
36 उसी बखत, मेरी बुद्धि फेर ज्यों की त्यों हो गई; अर मेरे राज्य की महिमा कै खात्तर मेरा प्रताप अर मुकुट मेरे पै फेर आ ग्या। अर मेरे मंत्री अर प्रधान माणस मेरे तै भेंट करण कै खात्तर आण लाग्गे, अर मै अपणे राज्य म्ह स्थिर होग्या; अर मेरी और घणी बड़ाई होण लाग्गी। 37 इब मै नबूकदनेस्सर सुर्ग के राजा परमेसवर नै सराहूं सूं, अर उसकी स्तुति अर महिमा करुँ सूं क्यूँके उसके सारे काम सच्चे, अर उसके सारे बरताव न्याय के सैं; अर जो माणस घमण्ड तै चालै सैं, उन ताहीं वो नीच्चा कर सकै सै।