13 मन्नै रात म्ह सपने म्ह देख्या, और देक्खो, माणस की सन्तान जिसा कोए अकास कै बाद्दळां समेत आ रह्या था, अर वो उस प्राचीन के धोरै पोहच्या, अर उस ताहीं वे उसके धोरै ल्याए। 14 फेर उस ताहीं इसी प्रभुता, महिमा अर राज्य दिया गया, के देश-देश अर जात्ति-जात्ति के माणस अर अलग-अलग भाषा बोलण आळे सारे उसके अधीन हों; उसकी प्रभुता सदा तक अटल, अर उसका राज्य अविनाशी ठहरया।"
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