13 मन्नै रात म्ह सपने म्ह देख्या, और देक्खो, माणस की सन्तान जिसा कोए अकास कै बाद्दळां समेत आ रह्या था, अर वो उस प्राचीन के धोरै पोहच्या, अर उस ताहीं वे उसके धोरै ल्याए। 14 फेर उस ताहीं इसी प्रभुता, महिमा अर राज्य दिया गया, के देश-देश अर जात्ति-जात्ति के माणस अर अलग-अलग भाषा बोलण आळे सारे उसके अधीन हों; उसकी प्रभुता सदा तक अटल, अर उसका राज्य अविनाशी ठहरया।"
27 फेर राज्य अर प्रभुता अर धरती पै के राज्य की महिमा, परमप्रधान परमेसवर ही की प्रजा यानिके परमेसवर के पवित्र माणसां नै देई जावैगी, उसका राज्य सदा का राज्य सै, अर सब प्रभुता करण आळे उसके अधीन होवैगें अर उसका हुकम मानैंगे।’"