पौलुस की आत्मिक ज्ञान खात्तर प्रार्थना
15,16 इस कारण, जिब तै मन्नै भी प्रभु यीशु मसीह म्ह थारे बिश्वास अर पवित्र माणसां के प्रति थारे प्यार के बारें म्ह सुण्या, तो मै परमेसवर का सदा धन्यवाद करुँ सूं, अर अपणी प्रार्थना म्ह थमनै हमेशा याद राक्खूँ सूं। 17 मै प्रार्थना करुँ सूं, के महिमामय परमेसवर जो के म्हारे प्रभु यीशु मसीह का पिता सै, वो थारे ताहीं आत्मिक समझ अर ज्ञान देवै, ताके थम परमेसवर नै पूरी तरियां जाण सकों। 18 मै या भी प्रार्थना करुँ सूं, के वो सच्चाई जाणण म्ह थारी मदद करै के थम जाण सकों के परमेसवर के जरिये बुलाये जाण की आस के सै, अर थम जाण सकों के इतणी बड़ी अर महान् आशीष अपणे पवित्र माणसां खात्तर राख राक्खी सै। 19 मै चाहूँ सूं के थम उसनै जाण सको, के उस महान् परमेसवर नै यीशु मसीह पै बिश्वास करण आळे खात्तर जो शक्ति राख राक्खी सै, या वाए बड़ी शक्ति सै। 20 जिसनै मसीह ताहीं मरे होया म्ह तै जिवाया अर सुर्ग म्ह अपणी सोळी ओड़ बैठाया। 21 सारी ढाळ की प्रधानता, हक, सामर्थ, प्रभुता के उप्पर राज करैगा जो इस लोक म्ह सै, अर आण आळे लोक म्ह भी राज करैगा। 22 परमेसवर नै सारा किमे उसकै पायां तळै कर दिया, अर उसनै कलीसिया की भलाई खात्तर सब किमे उसके हाथ्थां म्ह सौप दिया। 23 कलीसिया मसीह की देह सै, अर उसतै भरपूर सै, वो अपणी मौजूदगी तै हरेक चीज अर हरेक जगहां नै भरै सै।