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भजन संहिता 48

िपरमसवर महि

रहविों भजन

1 परमसवर नगर , अर अपण

पविपरवत

यहमहअर घणबड़ाै! (ा)

2 िपरवत दर अर

धरतआननरण ै,

िनगर उततरिै।

3 उस नगर महल्‍ां परमसवर ्‍गढ

गयै।

4 ूँो, त-सकठ,

एक हमलकरण तर आगबढ़े।

5 उननआपा,

अचमिे, अर डरके।

6 ओड़ै पकउन ीं पकडा,

अर जच्‍तरिां उनकदरा।

7 हव

तरनगर जहां ै।

8 यहनगर ,

अपणपरमसवर नगर , िहमन

ा, उसै;

परमसवर उसनसदरकिा।

9 परमसवर हमनमनदर ितर

करकरयै;

10 परमसवर

बड़ाधरततक ै।

िकतभरयै;

11 ां रण

िपरवत मनै,

अर यहनगर48:11 नगरो बेटियाँ िमगन ो!

12 िओड्‍ों, अर उसक

चक्‍कर लग,

उसकमटां िो,

13 उसकमजबां िांकरो, उसक

महल्‍ां ो;

िसतथम आण आऴी

इसकें बतसकों।

14 ूँपरमसवर सदा-सद

परमसवर ै,

तक अगकरा।

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