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भजन संहिता 76

जयवनपरमसवर

रधबजआळतर: रआळां , आसभजन,

1 परमसवर यहगयै,

उसकइसएल महै।

2 अर उसकमण्‍डप 76:2 शालेम यरुशलेम का नगर ,

अर उसकिै।

3 ओड़ै उसनां ीं,

अर , तलवअर लड़ाऔर हथिां ीं रया। (ा)

4 परमसवर िमय ै,

िभरपह़ां घणबढअर महै।

5 मजबमन आळटगे, अर गहरींपड़े ै;

अर रवां िा।

6 परमसवर, धमकै,

रथां सम़े गहरींपड़े ै।

7 िभययै;

अर िकरण ै, खडरह सका?

8 तन्‍सलै,

धरतउस बखत णकडरगी, अर रही,

9 िपरमसवर करण ै,

अर धरतनरम णसां उदकरण उठा। (ा)

10 जरणस जळजळहट बड़ारण ी,

अर जळजळहट रह ै, उसन्‍ा।76:10 अर जो जळजळाहट रह जावै, उसनै तू रोक्‍कैगा। जो माणस युद्ध म्ह बचगे वो तेरा त्यौहार मनावैंगे

11 अपणपरमसवर यहमन्‍नत ओटअर करो,

भय ै, उसकै-उसकतर ेंआवै।

12 रधां घमणिा;

धरतजयां भययपड़ै ै।

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