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भजन संहिता 74

उतां हत तर थन

आसमश

1 परमसवर, तन्‍ीं ूँ सदतर िै?

्‍ि चरां िूँ उठठण गरयै?

2 अपणमणडळिीं तन्‍बखत िा,

अर अपणितर ़ा िा,

अर इस िपरवत ीं ी, िसपरहया, कर!

3 अपणकदम अननखणडहरां ओडबढ़ा;

मतलब उन इयां ओडमन पवि्‍करै।

4 िपवि्‍गरजतरहवै;

उननअपणझणीं िबणै।

5 उन णसां सम

घणबण दरखतां ़े चलै।

6 अर इब उस भवन नक्‍ै,

़िाँ अर हथ़ा कतै।

7 उननपवि्‍ीं आग ोंिै,

अर भवन ीं अशकर िै।

8 उननमन कह"हम इन ीं एकदम दबांें।"

उननइस परमसवर सभजगहां ीं ूँिै।

9 हमनइब परमसवर चमतिे;

इब नबरहया,

णण आळदशकद ीं रहवी।

10 परमसवर िकद तक बदनकरदरहवा?

मन, सदकरदरहवा?

11 अपणूँ ्‍रहवै?

उसनअपणजर कर उनकअनकरदे।

12 परमसवर बखत ै,

धरतउदकरदआयै।

13 तन्‍अपणशकि समदर ीं कर िा;

तन्‍समदरषसां िां ीं िा।

14 तन्‍ि74:14 लिव्यातान यो उस बखत का एक भोत बड़ा समुन्दरी जीव था जो बुराई का प्रतीक मान्या जावै था िकड़े-कड़े करकगळनवरां74:14 जंगळी जानवरां बियाबान म्ह रहण आळे माणस ीं ि

15 तन्‍लकजल बह,

तन्‍रहबहण आळनदिाँ ीं िा।

16 िै;

रज अर ाँीं तन्‍िकरयै।

17 तन्‍धरतहद हर;

गरअर सर्‍तन्‍बणै।

18 यहा, कर मन मजबणै,

अर णसां करै।

19 अपणकबतरगळी-पशबस कर;

अपणणसां सदतर ्‍

20 अपणकरओडे;

ूँअनजगहां अतघरां भरपै।

21 पईसणस िदर आणपड़ै;

अर दरिबड़ाकरण ै।

22 परमसवर, उठ, अपणकददमआपलड़;

िभर मजउड़ारहवै, उसनकर

23 अपणिाँ बड़ा ्‍ै,

ििाँ हल लगउठदरहवै।

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