1 जात्ति-जात्ति के माणस क्यूँ हुड़दंग मचावै सै,
अर देश-देश के माणस क्यूँ साजिस रचण लागरे सै?
2 यहोवा अर उसके चुणे होये कै बिरुध्द धरती के राजा मिलकै,
अर हाकिम आप्पस म्ह साजिस रचकै, कहवै सै,
3 "आओ, हम उनके बन्धनां नै तोड़ द्या,
अर उनकी रस्सियाँ नै अपणे उप्पर तै उतार फेक्कां।"
4 वो जो सुर्ग म्ह बैठ्या सै, हास्सैगा,
प्रभु उनका मजाक उड़ावैगा।
5 फेर वो उनतै छो म्ह बात करैगा,
अर छो म्ह आकै यो कहकै उननै डरा देवैगा,
6 "मन्नै तो अपणा चुण्या होया राजा
अपणे पवित्र पर्वत सिय्योन की राजगद्दी पै बिठा दिया सै।"
7 मै उस वचन का प्रचार करुँगा,
जो यहोवा नै मेरै तै कह्या, "तू मेरा बेट्टा सै,
आज ए मन्नै तेरे ताहीं जन्माया सै।
8 मेरै तै माँग, अर मै जात्ति-जात्ति के माणसां नै तेरी सम्पत्ति होण खात्तर,
अर दूर-दूर के देशां नै तेरी अपणी धरती बणण खात्तर दे दियुँगा।
9 तू उननै लोहे के डण्डे तै टुकड़े-टुकड़े करैगा।
तू कुम्हार के बरतन की तरियां उननै चकणाचूर कर देवैगा।"
10 इस करकै इब, हे राजाओं, अकलमंद बणो;
हे धरती पै राज करण आळेयो, सावधान हो जाओ।
11 डरदे होए यहोवा की भक्ति करो,
अर काँम्बदे होए मगन होओ।
12 बेट्टे तै प्यार करो, इसा ना हो के वो छो म्ह आवै,
अर थम राह म्ह ए नाश हो जाओ;
क्यूँके पलभर म्ह ए उसका छो भड़कण आळा सै।
धन्य सै वे जो उस म्ह शरण लेवै सै।