1 हे सेनाओं के यहोवा, तेरे रहण की जगहां कितनी प्यारी सै!
2 मेरा जी यहोवा के आँगणां की अभिलाषा करदे-करदे बेसुध होग्या सै;
मेरा तन-मन दोन्नु जिन्दे परमेसवर नै पुकारण लागरे सै।
3 हे सेनाओं के यहोवा, हे मेरे राजा, अर मेरे परमेसवर, तेरी वेदियाँ म्ह गौरैया नै अपणा बसेरा
अर शूपाबेनी नै आल्हणा बणा लिया सै जिस म्ह वा अपणे बच्चें राक्खे।
4 कितणे धन्य सै वो, जो तेरे भवन म्ह रहवै सै;
वो तेरी स्तुति लगातार करदे रहवैगें। (सेला)
5 कितणे धन्य सै, वो माणस जो तेरे तै ताकत पावै सै,
अर वो जिन नै सिय्योन की सड़क का ख्याल रहवै सै।
6 वे रोण की तराई म्ह जान्दे होए उसनै चोयां की जगहां बणावै सै;
फेर बारिस की आगली बूंद उस म्ह आशीष ए आशीष तै उपजावै सै।
7 वो ताकत पै ताकत पान्दे जावै सै;
उन म्ह तै हर एक जन सिय्योन म्ह परमेसवर नै अपणा मुँह दिखावैगा।
8 हे सेनाओं के परमेसवर यहोवा, मेरी प्रार्थना सुण,
हे याकूब के परमेसवर, कान लगा! (सेला)
9 हे परमेसवर, हे म्हारी ढाल, निगांह कर;
अर अपणे अभिषिक्त का मुँह देख!
10 क्यूँके तेरे आँगणां म्ह का एक दिन किते और के हजार दिनां तै घणा बढ़कै सै।
दुष्टां के डेरयां म्ह रहण तै
अपणे परमेसवर के भवन की देह्ळी पै खड्या रहणा ए मन्नै घणा भावै सै।
11 क्यूँके यहोवा परमेसवर सूरज अर ढाल सै;
यहोवा अनुग्रह करैगा, अर महिमा देवैगा;
अर जो माणस खरी चाल चाल्लै सै;
उननै वो किसे भी आच्छी चीज कै बिना न्ही रहण देगा।
12 हे सेनाओं के यहोवा,
कितना धन्य सै वो माणस, जो तेरे पै भरोस्सा राक्खै सै!