1 हे यहोवा, अपणे छो म्ह आकै मन्नै ना झिड़कै,
अर जळजळाहट म्ह आकै मन्नै सजा ना देवै!
2 क्यूँके तेरे तीर मेरै लाग्गै सै,
अर तेरे हाथ कै तळै दब्या सूं।
3 तेरे छो कै कारण मेरी देह म्ह कुछ भी
ठीक-ठाक कोनी;
अर मेरे पाप कै कारण मेरी हड्डियाँ म्ह
भी बेचैनी सै।
4 क्यूँके मेरे अधर्म के काम्मां म्ह
मेरा सिर डूब ग्या,
अर वे भारी बोझ की तरियां मेरे सहण तै
बाहर होग्ये सै।
5 मेरी मूर्खता के पाप कै कारण मेरे घाव सड़गे सै
अर उनतै बदबू आवै सै।
6 मै घणा दुखी सूं अर झुक ग्या सूं;
दिन भर मै शोक का पैहरावा
पैहरकै मै घूम्मू सूं।
7 क्यूँके मै भित्तर तै जळदा रहूँ सूं,
अर मेरी सेहत भी ठीक कोन्या।
8 मै कमजोर अर घणा टूटकै चूर होग्या सूं;
मै अपणे मन की घबराहट तै कहराऊ सूं।
9 हे प्रभु मेरी सारी अभिलाषा तेरे स्याम्ही सै,
अर मेरा कहराणा तेरे तै छिपा कोन्या।
10 मेरा मन घबरावै सै,
मेरी ताकत घटती जावै सै;
अर मेरी आँखां की रोशनी भी
कम होगी।
11 मेरे मित्तर अर मेरे संगी
मेरी हालत देखकै न्यारे पाटगे,
अर मेरे कुण्बे आळे भी दूर जा खड़े होए।
12 मेरे प्राण के ग्राहक मेरै खात्तर जाळ बिछावै सै,
अर मेरे नुकसान की योजना बणाण आळे
बुराई की बात बोल्लै सै,
अर दिन भर छळ की तरकीब सोच्चै सै।
13 पर मै बहरे की तरियां सुणदा ए कोनी,
अर मै गूँगे के की तरियां मुँह कोन्या खोल्दा।
14 बल्के मै इसे माणस के बराबर सूं
जो किमे न्ही सुणदा,
अर जिसके मुँह तै विवाद की कोए
बात न्ही लिकड़ती।
15 पर हे यहोवा,
मन्नै तेरे पैए आस लगाई सै;
हे प्रभु, मेरे परमेसवर,
तू ए जवाब देगा।
16 क्यूँके मन्नै कह्या,
"इसा ना हो के वे मेरे पै आनन्द करै;
जै मेरा पैर तिसळ जावै सै,
फेर मेरे पै अपणी बड़ाई मारे सै।"
17 क्यूँके मै तो गिरण पै सूं;
अर मेरा शोक लगातार मेरे स्याम्ही सै।
18 इस करकै के मै तो अपणे अधर्म नै जाहिर करुँगा,
अर अपणे पाप कै कारण दुखी रहूँगा।
19 पर मेरे दुश्मन अनगिणत सै,
अर मेरे बैरी भोत होगे सै।
20 जो भलाई कै बदलै म्ह बुराई करै सै,
वो भी मेरी भलाई कै पाच्छै चाल्लण कै
कारण मेरे तै बिरोध करै सै।
21 हे यहोवा, मेरे ताहीं छोड़ै ना!
हे मेरे परमेसवर, मेरे तै दूर ना हो!
22 हे यहोवा, मेरे उद्धारकर्ता,
मेरी मदद खात्तर फुर्ती कर!