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भजन संहिता 95

ि

1 आओ हम यहतर ्‍आवां,

अपणउदचटजयजयककरां!

2 हम धनयवकरदउसकआवां,

अर भजन उसकजयजयककरां।

3 ूँयहमहपरमसवर ै,

अर वतां उपपर महै।

4 धरतुंजगहां उसै;

अर पह़ां उसै।

5 समदर उसकै, अर उसउस ीं बणा,

अर धरतउसरचनै।

6 आओ हम ककदणडवत करां,

अर अपणकरयहटनां!

7 ूँपरमसवर ै,

अर हम उसकचररज

अर उसकां।

आचा, आज थम उसकणदे!

8 अपणा-अपणिइसकठकरो, िमर95:8 मरीबा झगड़ा करणा ,

अर मसििा,

9 िां ीं परखा,

उननीं ाँअर ीं ा।

10 ीं उस ़ी ां रहा,

अर मन्‍कहा, "भरमआळमन ै,

अर उननि95:10 उननै मेरी राह न्ही पिच्छाणीउननै मेरे हुकमां का पालन न्ही करया"

11 इस करकमन्‍आककसम

ि्‍कदबडैंें।

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