10 भोज के सातमै दिन, जिब राजा का मन दाखमधु म्ह मगन था, फेर उसनै महूमान, बिजता, हर्बोना, बिगता, अबगता, जेतेर अर कर्कस नाम के सात्तु खोज्यां ताहीं जो क्षयर्ष राजा कै स्याम्ही सेवा पाणी करया करदे, हुकम दिया, 11 के राणी वशती नै राजमुकुट धारण करे होए राजा कै स्याम्ही ले आओ; जिसतै के देश-देश के माणसां अर हाकिमां पै उसकी खूबसूरती दिखाई जावै; क्यूँके वा देखण म्ह सुथरी थी। 12 खोज्यां कै जरिये राजा का यो हुकम पाकै राणी वशती नै आण तै मना कर दिया। इसपै राजा बड़े छो तै भरग्या।
19 जै राजा नै कबूल हो, तो यो हुकम दे, अर फारसियां अर मादियाँ के कानून म्ह लिख्या भी जावै, जिस ताहीं कदे भी बदल ना सकै, के राणी वशती राजा क्षयर्ष कै स्याम्ही फेर कदे आण न्ही पावै, अर राजा पटराणी का पद किसे दुसरी नै दे दे जो उसतै आच्छी हो।